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धर्म-ज्योतिषइंदौर

साधु जनों से संबंध कष्टो का निवारण करता है – युवराज स्वामी यतींद्राचार्य

धरा एवं प्रकृति का संरक्षण आवश्यक है

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धरती हमारी मां से भी बढ़कर है यह हमें सभी प्रकार की सुख सुविधा जीवन यापन के माध्यम प्रदान करती

*धरा एवं प्रकृति का संरक्षण आवश्यक है*

*साधु जनों से संबंध कष्टो का निवारण करता है – युवराज स्वामी श्री यतींद्राचार्य

इंदौर। हम इस धरा का केवल शोषण करते हैं दोहन करते हैं अत्याचार करते हैं हम अपने स्वार्थ के लिए खेती करते हैं हम अपने स्वार्थ के लिए अनाज खाते हैं उसके बदले में हम धरा को क्या देते हैं? यह धरती हमारी मां से भी बढ़कर है यह हमें सभी प्रकार की सुख सुविधा जीवन यापन के माध्यम प्रदान करती है। हमें इसका संरक्षण करना चाहिए प्रकृति का संरक्षण करना चाहिए गो संवर्धन करना चाहिए। उपरोक्त विचार *युवराज स्वामी श्री यतींद्राचार्य जी* ने आज पाराशर नगर में चल रही भागवत कथा के दौरान व्यास पीठ से श्रद्धालुओं के समक्ष व्यक्त किये। उन्होंने कहा हमें जरा सा कष्ट होने पर हम भगवान के द्वार चले जाते हैं भगवान अंतर्यामी है वह हमारे कष्ट को जानते है। जब आपकी मित्रता या संबंध साधु जनों से गुरुजनों से हो तो कष्ट आएगा ही नहीं और यदि आ भी गया तो आसानी से दूर हो जाएगा। हमें हमेशा सत्कर्म करते रहना चाहिए।

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समिति के आयुष लाठी एवं मनोहर सोनी ने बताया कि आज भक्त प्रहलाद का जन्मोत्सव कथा के दौरान मनाया गया भगवान नरसिंह अवतार की कथा के दौरान नरसिंह जी का प्राकट्य उत्सव भी धूमधाम से मनाया गया भजन गायक राम हुरकट कथा के दौरान भजनों की प्रस्तुतियां देते रहे। प्रारंभ में व्यास पीठ का पूजन भगवानदास हेड़ा निलेश लाठी ,ओम जी चिचानी, उर्मिला लाठी अनुराग तिवारी ने किया तीसरे दिवस की कथा पूर्ण होने पर भागवत की आरती की गई एवं गोष्टी प्रसाद का वितरण हुआ।

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