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धर्म-ज्योतिषइंदौर

मन को निर्मलता और पवित्रता प्रदान करता है भागवत कथा का श्रवण

लोहारपट्टी स्थित खाड़ी के मंदिर पर सात दिवसीय संगीतमय भागवत ज्ञानयज्ञ का शोभा यात्रा के साथ हुआ शुभारंभ

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मन को निर्मलता और पवित्रता प्रदान करता है भागवत कथा का श्रवण

लोहारपट्टी स्थित खाड़ी के मंदिर पर सात दिवसीय संगीतमय भागवत ज्ञानयज्ञ का शोभा यात्रा के साथ हुआ शुभारंभ

इन्दौर। जीवन का आनंद भक्ति में है, भोग में नहीं। संसार का आनंद जड़ में नहीं, चैतन्य में होता है। केवल परमात्मा ही चैतन्य स्वरूप हैं, बाकी सब जड़ है। जितने भी भक्त और संत भारत भूमि पर हुए हैं, उन्होंने भक्ति के माध्यम से समाज को चैतन्य और ऊर्जावान बनाया है। भागवत कथा का श्रवण जन्म जन्मान्तर के पुण्योदय से ही संभव है। कथा जीवन के संशयों से मुक्ति का सहज माध्यम है। भगवान की कथा का श्रवण मन को निर्मलता और पवित्रता प्रदान करता है।

भागवत भूषण आचार्य पं. राजेश शास्त्री के, जो उन्होंने लगभग 350 वर्ष प्राचीन, लोहारपट्टी स्थित श्रीजी कल्याण धाम, खाड़ी के मंदिर पर हंसदास मठ के पीठाधीश्वर श्रीमहंत स्वामी रामचरणदास महाराज एवं महामंडलेश्वर महंत पवनदास महाराज के सानिध्य में बुधवार से प्रारंभ हुए भागवत ज्ञानयज्ञ के शुभारंभ सत्र में व्यक्त किए। कथा शुभारंभ के पूर्व लोहारपट्टी स्थित खाड़ी के मंदिर से भागवतजी की शोभा यात्रा भी बैंड-बाजों सहित निकाली गई जिसमें बड़ी संख्या में भजन एवं गरबा मंडलियां, परंपरागत परिधान में राधा रानी महिला मंडल की मातृशक्ति सहित अनेक श्रद्धालु नाचते-गाते हुए शामिल हुए। मार्ग में अनेक स्थानों पर भक्तों ने शोभा यात्रा एवं भागवताचार्य पं. शास्त्री तथा महामंडलेश्वर जी पर पुष्प वर्षा की। कथा स्थल पहुंचने पर व्यासपीठ का पूजन हंस पीठाधीश्वर स्वामी रामचरणदास महाराज के सानिध्य में महामंडलेश्वर महंत पवनदास, जयदीप दुबे, कैलाश गवला, श्रीमती वर्षा शर्मा, उषा सोनी, श्रेया शर्मा, श्रुति शर्मा, गीता व्यास, वेदांत शर्मा, चंदा खंडेलवाल, बबली खंडेलवाल, निर्मला सोलंकी, मधु सुगंधी, उर्मिला प्रपन्न, हंसा पंचोली, हेमलता वैष्णव, मधु गुप्ता आदि ने किया। अतिथियों का स्वागत पं. अमितदास, अशोक चतुर्वेदी, महंत यजत्रदास आदि ने किया।

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मठ के पं. अमितदास महाराज ने बताया कि भागवत ज्ञान यज्ञ का यह क्रम 30 दिसम्बर तक प्रतिदिन दोपहर 4 से सायं 7 बजे तक जारी रहेगा। इस दौरान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, गोवर्धन पूजा, रुक्मणी विवाह एवं सुदामा चरित्र जैसे उत्सव भी मनाए जाएंगे। मंदिर का वार्षिक अन्नकूट महोत्सव 31 दिसम्बर बुधवार को आयोजित होगा।

भागवताचार्य पं. शास्त्री ने भागवत की महिमा बताते हुए कहा कि भागवत हमारे अंतर्मन पर जमी धूल को साफ करने का काम करती है। बाहर की सफाई तो हम कई तरह के साबुनों, क्रीम आदि से कर लेते हैं, लेकिन अंदर की सफाई के लिए भागवत जैसे धर्मग्रंथ ही डिटर्जेंट का काम करते हैं। विडंबना यह है कि हम जितना ध्यान बाहर की सफाई पर देते हैं, उतना भीतर की सफाई के प्रति उपेक्षित रहते हैं। भागवत हमारे चरित्र को सुदृढ़ और सुंदर बनाती है। चरित्र से ही हमारा प्रारब्ध बनेगा और प्रारब्ध से ही जीवन बनेगा तथा जीवन से ही व्यक्ति, समाज और समाज से विश्व को शुद्ध करने की क्षमता आएगी।

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