बड़वाह। बड़वाह गुरुद्वारा साहेब में एक माह के लिए गतकें कला का प्रशिक्षण हुआ आरम्भ…

कपिल वर्मा बड़वाह। गतका एक पारंपरिक मार्शल आर्ट है, जो विशेषकर सिक्ख पंथ से जुड़ी एक कला है। यह तलवार, लाठी और ढाल के साथ आत्मरक्षा, अनुशासन और शारीरिक तंदुरुस्ती का अभ्यास है।
इसमें निपुणता के लिए लाठी से शुरुआत की जाती है। इसका प्रशिक्षण अब नेशनल गतका एसोसिएशन ऑफ इंडिया और विभिन्न अकादमियों के माध्यम से भी दिया जा रहा है।, उक्त उद्गार स्थानीय बड़वाह गुरुद्वारा साहेब में गतके के प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र में गुरु सिंघ सभा बड़वाह के अध्यक्ष सुरेंदर सिंह भाटिया ने रखे।
अमृतसर से पधारे प्रशिक्षक अमृतपाल सिंह ने बताया कि बड़वाह गुरुद्वारा साहेब में एक माह तक गतके का प्रशिक्षण सुबह एवं शाम दो सत्रों में आयोजित होगा, उन्होंने बताया किशुरुआत (बुनियादी): सबसे पहले शरीर को लचीला बनाने के लिए व्यायाम और लकड़ी की छड़ियों के साथ पेन्तरा या कदमों का अभ्यास सिखाया जाता है।
शस्त्र का अभ्यास: लकड़ी की छड़ी (गतका) के बाद तलवार, ढाल, और अन्य पारंपरिक हथियारों का उपयोग सिखाया जाता है। मानसिक और शारीरिक लाभ: यह एकाग्रता, गति, संतुलन, और आत्मरक्षा कौशल में सुधार करता है। आजकल ऑनलाइन कोचिंग के माध्यम से भी इसे सीखा जा सकता है।
समिति के सचिवद्वय सरदार परविंदर सिंह एवं सरदार गुलबीर सिंह ने बताया कि गतका अब एक खेल के रूप में विकसित हो चुका है। पटियाला के पंजाबी विश्वविद्यालय में इसके लिए डिप्लोमा कोर्स भी उपलब्ध है, जो इसे पेशेवर कोच बनने का अवसर प्रदान करता है। यह मार्शल आर्ट केवल पुरुषों तक सीमित नहीं है और इसे कोई भी सीख सकता हैं।
इसके पूर्व आज उदघाटन सत्र में समाज के सरदार अवतार सिंह,सरदार मोहन सिंह, सरदार प्रदुमन सिंह, सरदार हरविंदर सिंह, सरदार सुरजीत सिंह, सरदार इकबाल सिंह,सरदार रघुवीर सिंह,सरदार जितेंदर सिंह, सरदार गुरबख्श सिंह, सरदार परमीत सिंह, सरदार जसराज सिंह, सरदार अमन संधु आदि के साथ साथ समाज के युवा, बुजुर्ग एवं समाज की महिलाएं भी उपस्थित रही। उक्त जानकारी समिति के मीडिया प्रभारी सरदार सतविंदर सिंह ने दी।



