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इंदौर

भारत के विकास में अंतिम व्यक्ति की सहभागिता ही भारत उदय

समापन पर बोले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 0अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख - प्रदीप जोशी

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– भारत के विकास में अंतिम व्यक्ति की सहभागिता ही भारत उदय
– समाज की नकारात्मकता दूर करने के लिये सामाजिक ऑडिट जरूरी
– समापन पर बोले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख – प्रदीप जोशी।
– नर्मदा साहित्य मंथन के पांचवे आयाम का समापन, तीन दिनों तक चला वैचारिक मंथन।

इंदौर, । भारत शोध और बोध का देश रहा है और दोनों का आधार ही आध्यात्म रहा है। हमारे विचार का आधार भी आध्यात्म ही है। आज भारत का उदय हो रहा है। भारत के विकास में समाज के अंतिम व्यक्ति की सहभागिता ही वास्तव में भारत उदय है। अंतिम व्यक्ति के जीवन में बदलाव आना ही वास्तव में भारत उदय है। आज का समय भारत उदय का है, लेकिन इस पर और ज्यादा गहराई से मंथन की आवश्यकता है। समाज की नकारात्मकता और दुर्बलता को दूर करने के लिये सामाजिक ऑडिट भी होना चाहिये।
यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख श्री प्रदीप जोशी जी ने ’मंथन से प्रबोधन’ विषय पर कही। आप रविवार को देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के मुख्य सभागृह में नर्मदा साहित्य मंथन के समापन सत्र को सम्बोधित कर रहे थे। आपने कहा कि, जहां चार लोग खड़े होते है, वहां पाॅलिटिकल ऑडिट तो आरंभ हो जाता है, लेकिन भारत को आज सामाजिक ऑडिट की जरूरत है। समाज के क्या अच्छा हो रहा है, सामाजिक ताना-बाना कहा कमजोर हो रहा है, समाज में मेरी भूमिका क्या है? जैसे कई सामाजिक बिंदूओं पर हमें मंथन करना चाहिये। यह आज के समाज की जरूरत है। भारत का समाज कभी भी सरकार आधारित नहीं रहा है। भारत की सामाजिक व्यवस्था हमेशा से ही समाज आधारित रही है, जिसमें समाज के मुद्दों पर चिंतन-मनन होता था। समय के साथ समाज के मुद्दे बदल रहे है, जिस पर हमें खुद की भूमिका तय करना चाहिये। समाज के हर मुद्दे पर प्रबोधन होना चाहिये। यदि प्रबोधन नहीं होगा तो मुद्दों का समाधान नहीं निकलेगा। श्री जोशी ने कहा, हमें भारत के गौरवशाली भूतकाल से खुद को जोड़कर वर्तमान में खुद की भूमिका तय करनी होगी, तभी हम भविष्य की नींव रख सकेंगे। आज दुनिया में सभ्यता और आर्थिक ताकत का संघर्ष चल रहा है, जिसमें भारत की भूमिका अलग है। समाज को इस पर भी प्रबोधन करना चाहिये, ताकि भारत के पक्ष को हम मजबूती के साथ विश्व पटल पर रख सके। भारत के कई क्षेत्रों में कमियां भी है, जिसे मंथन से दूर किया जा सकता है। पद्मश्री श्री सुशील दोशी ने कहा कि मनुष्य ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति है और हमें देश को मजबूत करने के लिये काम करना चाहिये। आज जीवन में नैतिक मूल्यों की कमी आ रही है, जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। क्रिकेट ने देश को एक सूत्र में बांधने का काम किया है, जिस पर हमें भी काम करना चाहिये। धनवान और लोकप्रिय व्यक्ति बनने की बजाए हमें अच्छे व्यक्ति बनने पर जोर देना चाहिये। इस अवसर पर पद्मश्री  नारायण व्यास,  दिनेश गुप्ता, श्री पाणिनि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु शिवशंकर मिश्र और श्रीरंग पैढ़ारकर उपस्थित थे। आभार देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की विभागाध्यक्ष डा. सोनाली नरगूंडे ने माना।

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