
नैराश्य के गर्त से आशा और विश्वास के शिखर तक पहुँचाने में सक्षम है गीता के संदेश
प्रख्यात गीता मनीषी महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद के सानिध्य में कनाडिया रोड स्थित केबीसी सभागृह में तीन दिनी दिव्य गीता सत्संग का शुभारंभ

इंदौर। गीता हमारी आँखे खोलने वाला ग्रन्थ है। यह आँख विचार, विवेक और दिव्यता की दृष्टि प्रदान करती है। भगवद गीता वह दिव्य ग्रन्थ है जिसके संदेश नैराश्य के गर्त से व्यक्ति को आशा और विश्वास के शिखर तक पहुंचाने में सक्षम हैं। गीता की शुरुआत धृतराष्ट्र जैसे दृष्टिहीन पात्र के साथ होती है। यह अपने आप में अद्भुत तथ्य है कि जो गीता व्यक्ति को दिव्य दृष्टि प्रदान करती है उसकी शुरुआत एक दृष्टिहीन पात्र के साथ हो रही है। आज के वातावरण में समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए गीता हर दृष्टि से प्रासंगिक और बहुआयामी ग्रन्थ है। दुर्योधन ने महाभारत के युद्ध में किसी भी स्वजन से आशीर्वाद प्राप्त नहीं किया था जबकि अर्जुन को भगवान कृष्ण सहित विपक्ष के वरिष्ठों का भी आशीर्वाद मिला। जीवन में आशीर्वाद बहुत बड़ी पूंजी होती है। अहंकार और विनम्रता में अंतर देखना है तो दुर्योधन और अर्जुन के आचरण से समझा जा सकता है। गीता वर्तमान युग में पूरे विश्व के लिए मार्गदर्शक ग्रन्थ है।
ये दिव्य और प्रेरक विचार हैं प्रख्यात गीता मनीषी महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद के, जो उन्होंने शुक्रवार को कनाड़िया रोड, मोर्या हिल्स स्थित कुसुम देवी छावछरिया सभागृह पर सूठीबाई दौलतराम पारमार्थिक न्यास की मेजबानी में प्रारंभ हुए दिव्य गीता सत्संग अनुष्ठान के शुभारंभ सत्र में उपस्थित शहर के प्रबुद्ध और गणमान्यजनों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। प्रारंभ में यजमान समूह के बालकृष्ण छावछरिया, ट्रस्ट के चेयरमैन समाजसेवी विनोद अग्रवाल, वरिष्ठ समाजसेवी पुरुषोत्तम अग्रवाल (अग्रवाल ग्रुप), सचिव कुलभूषण मित्तल कुक्की, विमल तोडी, मनोरंजन मिश्रा, डॉ. निशा जोशी, विनय छावछरिया, जयश्री अग्रवाल, दिनेश मित्तल, टीकमचंद गर्ग, निर्मल रामरतन अग्रवाल, विष्णु बिंदल, अचल चौधरी, योगेन्द्र जैन बाबा एवं खजराना गणेश मंदिर के मुख्य पुजारी पं. अशोक भट्ट सहित आयोजन से जुड़े अनेक श्रद्धालुओं ने महामंडलेश्वरजी का स्वागत किया। सांसद दर्शन चौधरी एवं अन्य अतिथियों ने मंगलाचरण के बीच दीप प्रज्वलन कर इस गरिमापूर्ण आयोजन का शुभारंभ किया। ग्लोबल इंस्पीरेशन एनलाइटनमेंट आर्गेनाइजेशन ऑफ़ भगवद गीता (जीओ गीता) के अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री प्रदीप मित्तल (दिल्ली), समाजसेवी विनोद अग्रवाल, समन्वयक डॉ. कुलभूषण मित्तल एवं प्रदेश संयोजक मनोरंजन मिश्रा (भोपाल), एसएन गोयल समाधान एवं सीए एसएन गोयल ने आयोजन एवं ट्रस्ट के सेवा कार्यों के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी देते हुए इंदौर में गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंदजी के आगमन को सौभाग्य का सूचक बताया। कार्यक्रम में एमआईसी सदस्य निरंजन सिंह चौहान गुड्डू, पार्षद प्रणव मंडल, लायंस के अनेक पदाधिकारी, सीए पंकज गुप्ता, रसनिधि गुप्ता, वीरेन्द्र गुप्ता, डॉ. शरद डोसी, अनुराधा मिश्रा, सौगात मिश्रा, रवि अग्रवाल, राजेश बंसल सहित शहर की विभिन्न सामाजिक, धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने महामंडलेश्वरजी की अगवानी की और आरती में भाग लिया।
गीता के दसवें अध्याय के श्लोक 39 से 45 के सामूहिक पाठ से अपने प्रवचनों की शुरुआत करते हुए महाराजश्री ने कहा कि श्रीमद भगवद गीता 18 अध्यायों और 700 श्लोकों का बहुत छोटा शास्त्र है जो केवल हमारे पूजा घरों में रखने अथवा किसी सन्यासी और सेवानिवृत्त लोगों के लिए, नहीं बल्कि यह वह दिव्य ग्रन्थ है जिससे हम जीवन में और जीवन से जो कुछ चाहते हैं, वह प्राप्त कर सकते हैं। कभी-कभी मनुष्य हालातों के कारण विकृत वृत्ति का शिकार होकर अमर्यादित और अपराधिक कर्म कर बैठता है। जब मन चारों ओर से घिर जाता है तब व्यक्ति विषादग्रस्त हो जाता है। उस स्थिति में गीता हमारे लिए परमात्मा से योग करने का माध्यम बनकर हमें आशा और विश्वास के शीर्ष पर पहुँचा सकती है। गीता की शुरुआत धृतराष्ट्र और संजय के संवाद से हुई है। विश्वभर में शिरोमणि माने जाने वाले ग्रन्थ की शुरुआत यदि किसी नेत्रहीन पात्र से हो तो अटपटा लगता है लेकिन यह भी चिंतन करना होगा कि दृष्टि कितनी मूल्यवान होती है, इसका पता तब लगता है जब हम किसी दृष्टिहीन को देखकर दृष्टि का मूल्यांकन करेंगे। शरीर के किसी भी अंग का दुरूपयोग नहीं करने का सन्देश भी इस प्रसंग में मिलता है।
उन्होंने कहा कि सनातन भारत में ऐसे अनेक उदाहरण हैं जहाँ अंदर के विचार, भाव और विवेक की दृष्टि से सूरदास जैसे भक्त ने सवा लाख पदों की ऐसी रचना की मानो वे स्वयं वहां भगवान के श्रृंगार दर्शन कर रहे हों। गीता को इसीलिए आंख खोलने वाला ग्रन्थ कहा गया है। विचार, विवेक और ज्ञान की आँख गीता से ही खुलेगी। अर्जुन और दुर्योधन जब भगवान के पास युद्ध में मदद मांगने गए तो दुर्योधन ने भगवान से उनकी सेना और अस्त्र-शस्त्र मांगे लेकिन अर्जुन ने केवल भगवान को माँगा। दोनों की दृष्टि में यही अंतर समझना होगा। एक दृष्टि दुर्योधन के अहंकार की है और दूसरी अर्जुन की विनम्रता की। दुर्योधन के मन में भय था। अर्जुन ने निर्भय होकर भगवान पर विश्वास किया और उन्हें अपना सारथी बनाया। जहाँ भगवान स्वयं सारथी होंगे वहां पराजय का तो कोई कारण ही नहीं बनता। दुर्योधन ने तो अपने अहंकार के चलते गांधारी का आशीर्वाद भी खो दिया जबकि युधिष्ठिर को गुरु द्रोणाचार्य ने भी आशीर्वाद दिया। आशीर्वाद बहुत बड़ी पूँजी होती है। आशीर्वाद जीवन की संपदा है। इससे स्वयं को वंचित रखने वाले कभी सुखी नहीं रह सकते। आशीर्वाद और प्रसाद दिया नहीं, लिया जाता है। दुर्योधन और अर्जुन की सोच में जो अंतर है वह समझने की बात है। जब भी हमारे जीवन में दुर्योधन जैसी सोच आए तो सावधान हो जाएं। भगवान ने अर्जुन को निमित्त बनाकर गीता के माध्यम से हम सबके लिए जो सन्देश दिए हैं, उन्हें अपने जीवन में पूरी निष्ठा और ईमानदारी से आत्मसात कर लें तो कभी कोई समस्या नहीं आ पाएगी। कार्यक्रम का समापन आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
शनिवार को दोपहर 3 बजे से होंगे प्रवचन – कार्यक्रम समन्वयक कुलभूषण मित्तल कुक्की ने बताया कि शनिवार 7 फरवरी को दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक मोर्या हिल्स कनाडिया रोड स्थित कुसुमदेवी छावछरिया सभागृह में प्रख्यात गीता मनीषी महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद के आशीर्वचन होंगे। कथा स्थल पर भक्तों की सुविधा के लिए बैठक व्यवस्था, शुद्ध पेयजल, निशुल्क वाहन पार्किंग, साफ़-सफाई, सुरक्षा, प्राथमिक चिकित्सा सहित अनेक व्यवस्थाएं की गई हैं।
विमानतल पर अगवानी – शुक्रवार को सुबह विमान से इंदौर आगमन पर स्वामी ज्ञानानंदजी का आयोजन से जुड़े सूठीबाई दौलतराम पारमार्थिक न्यास के प्रमुख बालकृष्ण छावछरिया, समन्वयक कुलभूषण मित्तल कुक्की, डॉ. निशा जोशी, विकास गुप्ता, मनोरंजन मिश्रा (भोपाल), सीए पंकज गुप्ता सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने उनका आत्मीय और गरिमापूर्ण स्वागत किया। इस अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति सूर्यकान्त वशिष्ठ की धर्मपत्नी श्रीमती सविता वशिष्ठ ने भी महामंडलेश्वरजी का स्वागत कर उनसे सौजन्य भेंट की। महामंडलेश्वरजी ने उन्हें गीता की प्रति भेंट की और गीता के संदेशों के बारे में अवगत कराया। विमानतल से वे सीधे उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर के दर्शनार्थ प्रस्थित हो गए और वहां से लौटकर सेंट्रल जेल में कैदियों के बीच पहुंचकर प्रवचन दिए। महामंडलेश्वरजी शनिवार 7 फरवरी को सुबह 9.30 से 11 बजे तक टेलीफ़ोन नगर स्थित शेरिंगवुड स्कूल के कार्यक्रम में शामिल होकर सुबह 11.30 बजे से लायंस के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल खंडेलवाल के निवास पर पहुंचेंगे। दोपहर में 3 से 6 बजे तक दिव्य गीता सत्संग के पश्चात शाम 6 बजे बिचौली रोड स्थित वैष्णव देवी मंदिर पहुंचेंगे। रविवार 8 फरवरी को महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद सुबह 9 बजे सिलिकोन सिटी स्थित सुरजीत मिश्रा के निवास पर और 10 बजे फलौदी गौशाला पहुंचकर मनीष गुप्ता एवं अन्य सदस्यों से भेंट करेंगे। दोपहर में 12 बजे वे राज्य के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के निवास पर दोपहर का भोज करेंगे। दोपहर में 3 से 6 बजे तक दिव्य गीता सत्संग में शामिल होकर शाम 6.15 बजे विमानतल के लिए प्रस्थित हो जाएँगे।
सूठीबाई दौलतराम पारमार्थिक न्यास के सेवा प्रकल्प – कार्यक्रम में एसएन गोयल समाधान एवं सीए एसएन गोयल ने सूठीबाई दौलतराम पारमार्थिक न्यास के सेवाकार्यों की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि न्यास के प्रमुख बालकृष्ण छावछरिया ने 84 वर्ष की उम्र में भी अपने सेवा प्रकल्पों को जारी बनाए रखा है। खजराना गणेश मंदिर में उन्होने अपने माता-पिता एवं पत्नी की स्मृति में अतिथि निवास, सत्संग भवन एवं भोजनशाला के निर्माण पर करीब 12 करोड़ रुपए खर्च किए हैं वहीँ कनाडिया रोड स्थित मोर्या हिल्स पर पत्नी श्रीमती कुसुम देवी की स्मृति में वातानुकूलित सभागृह का निर्माण कराया है। एक अन्य भवन भी मोर्या हिल्स पर बनवाया है जिसके किराये की राशि से चिकित्सा सेवा एवं विदेश जाकर उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक बालकों को बिना ब्याज के आर्थिक सहायता देने जैसे संकल्प उन्होंने ले रखे हैं। जल्द ही वे एक और बड़ा भवन पारमार्थिक सेवा कार्यों के लिए बनवाने की तैयारी कर रहे हैं। ट्रस्ट के चेयरमैन विनोद अग्रवाल ने भी ट्रस्ट के सेवा कार्यों की खुलेमन से सराहना की।



