
जीवन की धन्यता तभी संभव है जब हम स्वयं को मूल्यनिष्ठ, सेवा प्रधान और जागरूक बनाने का पुरुषार्थ करें : पं. मेहता
वन बंधु परिषद इंदौर चैप्टर द्वारा रवीन्द्र नाट्य गृह में “उजास की ओर” कार्यक्रम का आयोजन
इंदौर। हमारा जीवन कर्म प्रधान है। दुर्लभ मनुष्य जीवन की धन्यता तभी संभव है जब हम स्वयं को मूल्यनिष्ठ, सेवा प्रधान और जागरूक बनाने के लिए निरंतर सार्थक पुरुषार्थ करें। हमारे कर्म ही हमें समाज में श्रेष्ठ या उपेक्षित बनाते हैं। मनुष्य चाहे तो मृत्यु भी महोत्सव बन सकती है।
ये दिव्य विचार हैं प्रख्यात जीवन प्रबंधन गुरु पं. विजय शंकर मेहता के, जो उन्होंने वन बंधु परिषद इंदौर चैप्टर की मेजबानी में समाजसेवी देहदानी श्याम सुंदर मूंदड़ा की पुण्य स्मृति में आयोजित “उजास की ओर” कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में रवीन्द्र नाट्य गृह में सोमवार को आयोजित एक गरिमापूर्ण समारोह में व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान एवं ब्रह्मनाद ओम के सामूहिक उच्चारण के साथ हुआ। परिषद एवं महिला समिति के पदाधिकारियों, अखिलेश राठी, डॉ. आईएल मूंदड़ा, विकल्प मूंदड़ा सहित अन्य बंधुओं ने प्रारम्भ में दीप प्रज्वलन कर समारोह का शुभारंभ किया। अध्यक्षता समाजसेवी अखिलेश राठी ने की, जिन्होंने स्व. मूंदड़ा के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए वन बंधु परिषद के उद्देश्य एवं कार्यों की जानकारी भी प्रदान की। कार्यक्रम में श्रीमती रासू जैन, अनुराग मूंदड़ा एवं संदीपन आर्य, सीए अतिशय खासगीवाला ने भी अपने प्रेरक विचार व्यक्त किए। संदीपन आर्य ने अंगदान एवं देहदान का महत्व समझाया, वहीं खासगीवाला ने वसीयत एवं नॉमिनेशन की महत्ता बताई। अतिथियों का स्वागत श्रीमती सुषमा चौधरी, मनोज जैन, प्रवज्ञा, प्रत्युष एवं आयुष मूंदड़ा ने किया। अंत में आभार माना गौरव एरन ने।
पं. विजय शंकर मेहता ने अपने उद्बोधन में मनुष्य जीवन की सार्थकता, कर्मों की प्रधानता और श्रेष्ठता की प्रभावी विवेचना करते हुए देहदानी श्याम सुंदर मूंदड़ा को भावपूर्ण श्रद्धा सुमन समर्पित किए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शहर के धार्मिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं पदाधिकारी उपस्थित थे।



