प्रदेश मे सबसे बड़ी 51 फीट ऊंची गुड़ी के साथ नवसंवत्सर का स्वागत
चाणक्यपुरी चौराहे पर 23 वा विट्ठल रुक्मिणी संस्था का भव्य आयोजन

ढोल, मृदग, डमरू ओर शंखनाद से गूंजा देवी अहिल्या का शहर
उज्जैन महाकाल सवारी के ख्यात कलाकारों की विशेष प्रस्तुति
4 घंटे से ज्यादा चला प्रस्तुतियों का दौर, हजारों बने साक्षी
गुड़ धनिया के साथ 11000 मोतीचूर के लड्डु वितरित
चाणक्यपुरी चौराहे पर 23 वा विट्ठल रुक्मिणी संस्था का भव्य आयोजन
इंदौर। हिंदू नववर्ष गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर शहर एक बार फिर सनातन आस्था, परंपरा और सामाजिक समरसता के अद्भुत संगम का साक्षी बना. चाणक्यपुरी चौराहे पर सुबह 10बजे प्रदेश की सबसे ऊंची 51 फीट की भव्य गुड़ी पारंपरिक पूजन के साथ स्थापित की गई, जो नवसंवत्सर के स्वागत का दिव्य प्रतीक बनी, इस अवसर पर महाकाल की सवारी के ख्यात कलाकारो नें ढ़ोल, मृदंग,तासे,डमरू ओर शंखनाद की विशेष प्रस्तुति से सब का मनमोहन लिया.
विट्ठल रुक्मिणी संस्था के मयूरेश पिंगले ने बताया कि नववर्ष प्रतिपदा के इस पावन पर्व को अत्यंत हर्षोल्लास और भक्ति भाव से मनाया गया सुबह 10 बजे विधि-विधान से 51 फीट ऊंची गुड़ी का पूजन किया । इस दौरान उज्जैन से आए कलाकारों द्वारा ढोल, मृदंग और शंखनाद की गूंज पूरे वातावरण को भक्तिमय बना बना मानो स्वयं बाबा महाकाल की सवारी का दिव्य आभास हो रहा हो। इस अवसर पर वरिष्ठ स्वतंत्रता संग्राम ओर लोकतंत्र सेनानियों का शाल श्री फल से सम्मान किया प्रमुख रूप से महामंडलेश्वर दादू महाराज, भाजपा के नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा , विधायक गोलू शुक्ला, श्रीमती मालिनी गौड़,, महापौर पुष्यमित्र भार्गव जी, सुदर्शन गुप्ता जी, निशांत खरे, गोपाल गोयल, सीताराम व्यास आदि शामिल हुए यह आयोजन केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि समाज में एकता और समरसता का संदेश देने का माध्यम भी है। संस्था परंपरा को निभाते हुए समाज के हर वर्ग को एक सूत्र में पिरोने का कार्य कर रही है। इस वर्ष राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में वरिष्ठ जन, मिसाबंदियो का सम्मान समारोह किया श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रसादी की व्यवस्था की गई है। 11000 मोतीचूर के लड्डू और पारंपरिक गुड़-धनिया का वितरण किया जिससे उत्सव में शामिल हर व्यक्ति प्रसन्नता और आस्था का अनुभव के साथ आत्मीयता का भाव रहा।

कार्यक्रम में संत-महात्माओं का सानिध्य से आयोजन की आध्यात्मिक गरिमा और अधिक बड़ी । मयूरेश पिंगले ने बताया कि यह आयोजन केवल परंपरा निभाने का माध्यम नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सेवा संकल्प है, आयोजन महिलाओं बच्चों के साथ वृद्धि जान भी बड़ी संख्या में शामिल हुए जिन्होंने गुड्डी पूजन किया सूर्य देव को अर्क भी प्रदान कर नवसवतसर की बधाईया दी



