
सेंधवा। श्रीसंघ अध्यक्ष अशोक सकलेचा ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रथम दिवस 51 सदस्यों ने एकासन की आराधना में भाग लिया। उमेश गुरु चालीसा पाठ, 36 वंदना, अणु शतक जाप, सामायिक का तेला और सामूहिक एकासन की आराधना सम्पन्न हुई।
द्वितीय दिवस साध्वी मंडल के संघ के सदस्यों ने सपरिवार दर्शन किए। लगभग 65 सदस्यों ने सामूहिक एकासन में भाग लिया। यह आयोजन स्वर्गीय रामलालजी मेघराजजी सकलेचा की पुण्यतिथि पर सकलेचा परिवार की ओर से किया गया। साथ ही सामायिक का तेला भी रखा गया।
तृतीय दिवस नवकार महामंत्र जाप, गुणानुवाद सभा, सामायिक का तेला, एकासन तप और संवर की आराधना सम्पन्न हुई। लगभग 100 से अधिक श्रद्धालुओं ने एकासन तप में भाग लिया।
श्रद्धालुओं ने व्यक्त किए भाव
बच्चों को एकासन में सम्मिलित करने के लिए 14 सितंबर को कु. शुभी डॉ. अश्विन ओस्तवाल के जन्म दिवस पर बी.एल. जैन परिवार की ओर से एकासन की आराधना करवाई गई।
पूज्या श्री सुव्रताजी म.सा. ने तीन दिनों तक धर्मसभा में आचार्य प्रवर उमेशमुनिजी के जन्म काल, युवावस्था, दीक्षा प्रसंग, संयम चर्या और देवलोक गमन की संपूर्ण जानकारी दी।
गुणानुवाद सभा में बी.एल. जैन, प्रेमचंद सुराणा, राहुल बुरड, अशोक सकलेचा, महावीर सुराणा, भुषण जैन, डॉ. प्रतीक चोपड़ा, चन्दु बागरेचा, राजेंद्र कांकरिया और सौ. निधि जोगड ने आचार्य श्री के जीवन पर अपने भाव रखे।
राहुल बुरड ने कहा कि जैन संत के वस्त्रों में बाहें नहीं होती, इसलिए उन्हें क्रोध नहीं आता; उनके वस्त्रों में कालर नहीं होती, इसलिए उन्हें अहंकार नहीं होता; और उनके वस्त्रों में जेब नहीं होती, इसलिए उन्हें लोभ नहीं आता।
जीएसटी अपर आयुक्त लक्ष्मण सिंह सिंगाड ने भी प्रवचन में उपस्थित होकर संतों के दर्शन और जिनवाणी का लाभ लिया। उन्होंने कहा कि यह सौभाग्य की बात है कि हमें ऐसे संतों के प्रवचन सुनने का अवसर मिलता है।



