
*अफगानिस्तान के सिल्क पर कश्मीरी बुनकरों का कमाल… ‘दरबार’ साड़ी में दिखाई भारत की भव्यता*
– ‘सिल्क वीव्व एक्सपो’ का आयोजन अभय प्रशाल में 9 फरवरी तक
– देशभर के सिल्क बुनकर लेकर आए हैं अपने राज्य की खासियत

*इंदौर, सर्दियों के मौसम और वेडिंग सीजन को देखते हुए दस्तकारी हाट ‘सिल्क वीव्स एक्सपो’ का आयोजन किया जा रहा है । अभय प्रशाल में 9 फरवरी तक आयोजित इस आयोजन में देश भर के सबसे ज्यादा सिल्क बुनकर आए हैं।
आयोजक शमीन शाह ने बताया कि इस एक्सपो को इंदौर में साल में एक बार लगाया जाता है। इस बार 100 से ज्यादा स्टॉल पर 20 से ज्यादा राज्यों की खासियत लेकर आए हैं और इसमें कुछ खास छूट भी दी जा रही है। दस्तकारी हाट ‘सिल्क वीव्स एक्सपो’ (सिल्क महोत्सव) भारत के विभिन्न राज्यों के कुशल कारीगरों द्वारा निर्मित उत्कृष्ट सिल्क, कॉटन साड़ी, हस्तशिल्प और परिधानों की एक प्रमुख प्रदर्शनी है, जो पूरे देशभर में आयोजित की जाती है। एक्सपो सिर्फ एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि भारतीय हस्तकला और पारंपरिक बुनाई को बढ़ावा देने की एक बड़ी पहल है। प्रदर्शनी में
बनारस की बनारसी साड़ियां, बिहार की तसर सिल्क साड़ियां, पश्चिम बंगाल की तांत साड़ियां, ओडिशा की संबलपुरी साड़ियां और तमिलनाडु की कांजीवरम साड़ियां… राजस्थान के ब्लॉक प्रिंट दुपट्टे, कश्मीर की पश्मीना शॉल और गुजरात की बांधनी खास आकर्षण हैं ।

.. हर स्टॉल पर देश के बुनकरों की उस कला को देखा जा सकता है, जिसमें देश ही नहीं, पूरी दुनिया में भारत की एक अलग पहचान बनाई है। दस्तकारी हाट ‘सिल्क वीव्स एक्सपो’ (सिल्क महोत्सव) में देशभर के बुनकर एक छत के नीचे आए हैं। अभय प्रशाल में इसकी हुई है,
कई स्टॉल पर सर्दियों के मौसम को ध्यान में रखते हुए हल्के शेड्स, लाइट एंब्रॉयडरी और प्रिंटेड सूटिंग फैब्रिक है, तो वेडिंग के लिए भारी काम वाली सिल्क साड़ियों की विशेष मांग बनी हुई है। होम डेकोर सेक्शन में रंग-बिरंगी वूलन बेडशीट्स, पैचवर्क फैब्रिक से तैयार कुशन और पिलो कवर्स भी है। श्रीनगर के फैसल मलिक अफगानिस्तान के सिल्क पर किए खास काम को लेकर आए हैं। बताते हैं कि कच्चा सिल्क कपड़ा अफगानिस्तान से आता है, जिसपर कश्मीर के बुनकर हैंड वीविंग से खूबसूरत काम करते हैं। ये सिल्क माशरूक सिल्क के नाम से जाना जाता है। 25 दिन में 4 कारीगर लगातार काम करते हैं और खूबसूरत डिजाइन साड़ियों पर उतर जाती है। इस बार फैसल मलिक के पास ‘दरबार’ साड़ी उपलब्ध है, जिसपर भारत के राजशाही दरबार की भव्यता नजर आ रही है। सर्दियों के चलते लद्दाख से आए मोहम्मद हारिश के पास योक वूल के गरम कपड़े उपलब्ध है। जयपुर से हैंड ब्लॉक में जुट बेडशीट का भी अच्छा कलेक्शन एक्सपो में नजर आ रहा है। सिक्किम के शादाब अंसारी के पास तसर सिल्क साड़ी है। उन्होंने बताया कि तसर सिल्क का कपड़ा बाकी कपड़ों से खास और महंगा होता है। यह जंगली सिल्क एंथेरिया पैफिया पतंगों के कोकून से मिलता है, जो आसन के पेड़ों पर पलते हैं, जिसके कारण कपड़े में एक अनूठी सुनहरी चमक और एक समृद्ध, थोड़ा खुरदुरा टेक्सचर आता है। तसर रेशम का उपयोग सुंदर साड़ियों, कुर्तियों और स्टॉल्स बनाने में किया जाता है। कपड़ा पुरानी मेहनत भरी तकनीकों से बनता है और दुनिया भर में इसे ईको-फ्रेंडली फैशन के रूप में अपनी खास पहचान के लिए जाना जाता है।



