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इंदौर

नए संकल्प के साथ हुआ ‘जात्रा-2026’ का गरिमामय समापन

14 फोटोग्राफर्स सम्मानित; पाँच शहरों में स्किल सेंटर की घोषणा

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नए संकल्प के साथ हुआ ‘जात्रा-2026’ का गरिमामय समापन:

14 फोटोग्राफर्स सम्मानित;

पाँच शहरों में स्किल सेंटर की घोषणा

इंदौर: तीन दिनों तक परंपरा, प्रकृति और जनजातीय संस्कृति की जीवंत धड़कनों से सराबोर रहा ‘जात्रा-2026’ गांधी हॉल परिसर में गरिमामय समापन समारोह के साथ संपन्न हुआ। इस महोत्सव ने न सिर्फ जनजातीय कला, वनोपज, हस्तशिल्प और लोकसंस्कृति को मंच दिया, बल्कि शहर और जनजातीय समाज के बीच आत्मीय जुड़ाव का सशक्त सेतु भी निर्मित किया। समापन समारोह में विभिन्न प्रकाशनों से जुड़े 14 फोटोग्राफर्स को सम्मानित किया गया तथा उत्कृष्ट प्रतिभाओं को नकद पुरस्कार प्रदान कर उनकी रचनात्मकता को सराहा गया।

पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान प्रथम पुरस्कार 11,000 रुपए आनंद शिवहरे को प्रदान किया गया। द्वितीय पुरस्कार 5,000 रुपए जयेश मालवीय को तथा तृतीय पुरस्कार 3,100 रुपए श्री अभय तिवारी को दिया गया। चतुर्थ पुरस्कार के रूप में 2,100 रुपए की राशि श्री राजू रायाकवार को प्रदान की गई। सांत्वना पुरस्कार के रूप में 1,000-1,000 रुपए की राशि श्री राजकुमार वर्मा, श्री नितिन सोलंकी, श्री गोपाल वर्मा, श्री विशाल चौधरी, नवीन मौर्य, दीपक जैन, शंकर मौर्य, प्रवीण बरनाले, निलेश होलकर एवं देवेंद्र मालवीय को प्रदान की गई। सभी सम्मानित प्रतिभाओं को प्रशस्ति-पत्र और स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया।

20 से 22 फरवरी तक जनजातीय सामाजिक सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में बड़ी संख्या में शहरवासी, युवा, कलाकार और जनजातीय समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। तीनों दिनों तक परिसर ढोल-मांदल की थाप, सामूहिक लोकनृत्य और रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषाओं से जीवंत बना रहा। करमा, सरहुल और भगोरिया जैसे जनजातीय पर्वों की झलकियों ने दर्शकों को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर दिया। दूसरे दिन आनंदीलाल भावेल और उनकी टीम की लाइव म्यूजिकल नाइट ने माहौल को उत्सव में बदल दिया और झाबुआ, अलीराजपुर की संस्कृति को इंदौर की सरज़मीं पर उतार दिया।

इस अवसर पर समिति द्वारा एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की गई। जनजातीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से आदिवासी, जनजाति के छात्र छात्राओं के लिए मध्यप्रदेश के 5 शहरों में अगले एक साल में स्किल डेवलपमेंट सेंटर की आधारशिला रखी जाएगी, जहाँ पर डाटा एनालिसिस, एआई जैसे प्रोफेशनल कोर्स की पढ़ाई भी कराई जाएगी। यहाँ से ट्रेनिंग लेने वाले आदिवासी छात्र-छात्राओं को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएँगे।

जनजातीय सामाजिक सेवा समिति के अध्यक्ष देवकीनंदन तिवारी ने कहा, “जात्रा-2026 सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय अस्मिता और सम्मान का उत्सव है। हमें गर्व है कि शहर ने इस पहल को अपनाया और हजारों लोगों की उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि हमारी संस्कृति केवल परंपरा नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा भी है। पाँच शहरों में स्किल सेंटर की स्थापना इसी सोच का विस्तार है, जिससे हमारी युवा पीढ़ी आत्मनिर्भर बन सके।”

समिति के कोषाध्यक्ष गिरीश चव्हाण ने कहा, “हमारा उद्देश्य सिर्फ प्रदर्शनी लगाना नहीं था, बल्कि कलाकारों, कारीगरों और फोटोग्राफर्स को पहचान दिलाना था। जिन 14 फोटोग्राफर्स ने इस आयोजन की आत्मा को कैमरे में कैद किया, उनका सम्मान सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले समय में हम इस मंच को और व्यापक बनाएँगे।”

समापन समारोह में संभाग आयुक्त सुदाम खाड़े, कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल की गरिमामयी उपस्थिति रही। परम पूज्यनीय शनि साधक दादू महाराज जी तथा इंदौर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष अरविंद तिवारी भी समारोह में शामिल हुए। आयोजन के को-स्पॉन्सर महाकाली एजेंसी के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित अग्रवाल की उपस्थिति भी समापन समारोह में उल्लेखनीय रही। आयोजन के अन्य दिनों में भी अनेक विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। ‘फेस ऑफ इंडिया’ के रूप में विख्यात और कई प्रतिष्ठित ब्रांड्स के लिए मॉडलिंग कर चुकीं इंदौर की सुश्री निश्चला धारवा ‘जात्रा-2026’ का आधिकारिक फेस रहीं और पूरे आयोजन में सक्रिय सहभागिता निभाई। क्षेत्र क्रमांक 3 के विधायक श्री गोलू शुक्ला, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर तथा पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता की उपस्थिति ने भी आयोजन की गरिमा को और अधिक ऊँचाई प्रदान की।

आयोजन में 70 से अधिक स्टॉल लगाए गए थे, जहाँ जनजातीय कला, हस्तशिल्प, साहित्य, परिधान और पारंपरिक व्यंजनों की समृद्ध प्रस्तुति की गई। वनोपज और हर्बल उत्पादों के स्टॉल पर अर्जुन की छाल की चाय, पंचामृत इंस्टेंट एनर्जी ड्रिंक, लेमन-जिंजर, ठंडाई और लेमन हर्बल टी जैसे उत्पाद आकर्षण का केंद्र रहे। तुलसी, सौंफ, जामुन, अजवाइन, मस्टर्ड, लीची, सिडर और फ्लोरा हनी के फ्लेवर वाले ऑर्गेनिक शहद ने भी लोगों का ध्यान खींचा।

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हस्तशिल्प स्टॉल्स में बीट्स ज्वेलरी, कपड़े व वेस्ट मटेरियल से बनी गुड़िया, पारंपरिक तीर-कमान, आदिवासी जैकेट्स, जूट डेकोर, कैंडल्स और हैंड-पेंटेड उत्पादों ने दर्शकों को खूब प्रभावित किया। ट्रायबल फाउंडेशन द्वारा प्रदर्शित 25 से अधिक पेंटिंग्स और पिथोरा आर्ट गैलरी ने जनजातीय प्रतीकों और जीवन-दर्शन को सशक्त रूप में प्रस्तुत किया। भगोरिया पर्व पर आधारित फोटो प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही।

‘जात्रा-2026’ लोकधुनों, पारंपरिक व्यंजनों, वनोपज और हस्तशिल्प की जीवंत उपस्थिति के साथ इंदौर की सांस्कृतिक स्मृतियों में एक सशक्त अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। यह आयोजन सहभागिता, सम्मान और स्वावलंबन का प्रतीक बनकर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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