
अखंड धाम संत सम्मेलन का शुभारंभ, दो जगद्गुरुओं की गर्जना
शंकराचार्य बोले-भारत माता की रक्षा के लिए समूचे समाज को एकसूत्र में बंधना होगा,
जगद्गुरु स्वामी रामदयाल महाराज बोले-जागरूक नहीं हुए तो सनातन संस्कृति खतरे में
इंदौर। बिजासन रोड स्थित अविनाशी अखंड धाम आश्रम पर गुरुवार को 58वें अ.भा. अखंड वेदांत संत सम्मेलन का शुभारंभ देश के दो प्रमुख जगदगुरुओं की गर्जना के साथ हुआ। इनमें पहले भानपुरा पीठ के जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ ने जहाँ भारत माता की रक्षा के लिए समूचे समाज को एकसूत्र में बंधकर आतंकवादियों और विधर्मी ताकतों को ठिकाने लगाने का आह्वान किया वहीं अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के जगदगुरू आचार्य स्वामी रामदयाल महाराज ने कहा कि यदि समय रहते हम जागरूक नहीं हुए तो हमारी सनातन संस्कृति खतरे में पड़ जाएगी। वेदांत संत सम्मलेन भारतीय धर्म और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पुरुषार्थ है। हमारी सामाजिक विकृतियों को समाप्त कर युवा पौध को संस्कृति का पाठ पढ़ाना ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए।
संत सम्मेलन का शुभारंभ आश्रम के महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी चेतन स्वरूप के सानिध्य में जगदगुरू शंकराचार्य भानपुरा पीठाधीश्वर स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ की अध्यक्षता और रामस्नेही संप्रदाय के जगदगुरू आचार्य स्वामी रामदयाल महाराज के मुख्य आतिथ्य में वृंदावन से आए महामंडलेश्वर स्वामी जगदीशानंद, रतलाम से आए महामंडलेश्वर स्वामी देव स्वरुप, उज्जैन से आए स्वामी परमानन्द एवं गोधरा से आई साध्वी परमानंदा सरस्वती तथा होलकर वंश के वंशज रहे उदयसिंह होलकर ने ओंकारद्विज संस्कृत विद्यालय से आए वेदपाठी बटुकों द्वारा वैदिक मंगलाचरण के बीच दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया। स्वागत की श्रृंखला में आश्रम के स्वामी राजानंद, आयोजन समिति के अध्यक्ष हरि अग्रवाल, संयोजक अशोक गोयल, महासचिव दीपक जैन टीनू, संगठन सचिव भावेश दवे, कोषाध्यक्ष किशोर गोयल, समाजसेवी बालकृष्ण छावछरिया, जगदीश बाबाश्री, नारायण अग्रवाल 420 पापड़, ठा. विजय सिंह परिहार, डॉ. चेतन सेठिया, महेंद्र विजयवर्गीय, विनय जैन, रणधीर दग्घी, श्रीमती ज्योति श्रीवास्तव, श्रीमती स्वाति काशिद, ममता दुवे, अर्चना शर्मा, रितु श्रीवास्तव, सुश्री किरण ओझा, राजेश गर्ग, शिव जिंदल, ओमप्रकाश नरेड़ा, शैलेन्द्र मित्तल, राजेन्द्र मित्तल आदि ने सभी संत विद्वानों की अगवानी कर उनका स्वागत किया। इसके पूर्व आश्रम के प्रवेश द्वार पर संतों के आगमन पर दिग्विजय सिंह सांखला, परीक्षित पंवार, सचिन सांखला, आदित्य सांखला, श्रीमती चंदा तिवारी आदि ने पुष्प वर्षा कर उनकी अगवानी की। सनातन धर्म से भक्तों को जोड़ने के लिए पहली बार लक्की ड्रा निकाला गया और आरती तक उपस्थित रहने वाले 21 भक्तों को आकर्षक उपहार महेश दम्मानी के आतिथ्य में भेंट किए गए। संचालन हरि अग्रवाल ने किया और संत सम्मेलन का संचालन वेदांत भूषण स्वामी नारायणानंद ने किया।
सम्मेलन में महामंडलेश्वर स्वामी जगदीशानंद ने कहा कि परमात्मा का नाम ही आनंद और परमानंद स्वरूप है। परमात्मा नित्य भी हैं और अविनाशी भी हैं। संत परमात्मा के ही अंश होते हैं। शिवोहम महामंत्र के द्वारा उन्होंने सबके कल्याण का सहज मार्ग बताया है। साध्वी कृष्णानंद ने भी वेदांत की महिमा और संतों की भूमिका पर अपने प्रभारी विचार व्यक्त किए।
अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के जगदगुरू आचार्य स्वामी रामदयाल महाराज ने कहा कि वेदांत अमृत है। मोह-माया और ममता को मिटाने का सबसे आसान मार्ग वेदांत ही हैं। वेदांत का दर्शन सनातन धर्म, गुरू और धर्मग्रथों को समझाता है। वर्तमान में भक्ति की नहीं, बल्कि मानवता की जरूरत है। यदि मनुष्य होते हुए भी हममें मानवता के गुण नहीं हैं तो फिर ऐसी भक्ति की क्या लाभ।

जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ ने कहा कि संतों के साथ हमारे श्रोताओं को भी जागरूक होना पड़ेगा। जागरूक श्रोता ही वेद पुराण और रामायण का चिंतन कर सकता है। भारतीय संस्कृति की अनदेखी के कारण ही देश में वृद्धाश्रम की विकृति विकसित हो रही है। हम परिवार सहित सिनेमा देखने को जाते हैं लेकिन सत्संगों में क्यों नहीं जाते। हमारी युवा पीढ़ी इन विकृतियों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है लेकिन उसे अपने मोबाइल से चिपके रहने की विकृति से दूर रहना पड़ेगा। धर्म संस्कृति को बचाने के लिए सबको जागृत होना पड़ेगा।
अध्यक्ष हरि अग्रवाल ने बताया कि बिजासन रोड स्थित अखंड धाम पर आज से प्रारंभ हुए अ.भा. अखंड वेदांत संत सम्मेलन के दूसरे दिन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे से भजन-संकीर्तन के साथ जगद्गुरु स्वामी रामदयाल महाराज के सानिध्य में होगी। मुंबई में महामंडलेश्वर स्वामी चिदम्बरम सरस्वती सहित अनेक संत विद्वान सम्मेलन में शामिल होंगे। डाकोर के स्वामी देवकीनंदन, अयोध्या के स्वामी शिव रामानन्द, साध्वी आदित्य चेतना गिरि, गोधरा की साध्वी परमानंदा सरस्वती एवं लादूनाथ महाराज के शिष्य महंत रामकिशन महाराज भी शामिल होंगे।



