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इंदौर

अच्छे नारे देने से विश्व में कुछ नहीं होता है, हमें हथियार निर्माण में आत्मनिर्भर होना होगा – शर्मा

भारत को अपने व्यापार को समृद्ध बनाना होगा तभी विदेश नीति सफल होगी

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*भारत को अपने व्यापार को समृद्ध बनाना होगा तभी विदेश नीति सफल होगी*

*अच्छे नारे देने से विश्व में कुछ नहीं होता है, हमें हथियार निर्माण में आत्मनिर्भर होना होगा – शर्मा*

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इंदौर। सेंट्रल इंडिया फाउंडेशन थिंक टैंक के अध्यक्ष एवं 1981 बैंच के आईएफएस अधिकारी अशोक शर्मा ने कहा है कि विदेश नीति की सफलता के लिए जरूरी है कि भारत अपने व्यापार को समृद्ध बनाएं। विश्व में अच्छे नारे देने से कुछ नहीं होता है हमें हथियारों के निर्माण में आत्मनिर्भर बनना चाहिए।
वे आज शाम अभ्यास मंडल के द्वारा आयोजित मासिक व्याख्यान माला को संबोधित कर रहे थे। उनके व्याख्यान का विषय था- अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में भारत की विदेश नीति। इंदौर प्रेस क्लब के सभागार में आयोजित किए गए इस व्याख्यान में उन्होंने कहा कि पिछले तीन-चार सालों में देश की जनता ने विदेश के मामलों में रुचि लेना शुरू कर दी है। बहुत से परिवारों के कोई ना कोई सदस्य विदेश में जाकर बस गए हैं इसलिए भी यह रूचि पैदा हुई है। हमारी जीडीपी पूरी तरह से फॉरेन ट्रेड पर निर्भर है। देश की आजादी के बाद हम आदर्शवाद की नीति पर चले। हमने हमेशा उपनिवेशवाद का विरोध किया रंग भेद के खिलाफ लड़ाई लड़ी। ऐसी स्थिति में भी हम दक्षिण के देशों के नेता बने।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में जब देश में सरकार बदली तो भारत के द्वारा मल्टी एलाइनमेंट की पॉलिसी पर काम शुरू किया गया। इसमें हम किसी भी मुद्दे पर किसी देश के साथ हैं तो दूसरे मुद्दे पर उसे देश के खिलाफ भी है। इस पॉलिसी में राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखा जाता है। इसी पॉलिसी पर हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान भी चल रहा है। इस पॉलिसी की खासियत यह है कि कोई भी देश हमें दूसरे देश से संबंध बनाने से रोक नहीं सकता है।
शर्मा ने कहा कि हम ग्लोबल साउथ के लीडर है। ऐसे में सभी विकासशील देशों को इकट्ठा करने पर हमें जोड़ देना चाहिए। विश्व गुरु बनने के चक्कर में हमने अपना बहुत नुकसान किया है। किसी भी देश की ताकत का आकलन उसकी आर्थिक स्थिति और डिफेंस में पावर से किया जाता है। इन दोनों सेगमेंट में हम अभी बहुत कमजोर हैं। हमारे देश में पर कैपिटा इनकम भी बहुत कम है। डिफेंस प्रोडक्शन में हम बहुत पीछे हैं। हमारे यहां मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर कुछ भी नहीं है।
उन्होंने कहा कि आज से 25 साल पहले भारत और चीन एक समान स्थिति में थे बराबर थे। इसके बाद चीन ने खामोशी के साथ अपनी अंदरुनी ताकत को विकसित करने में ध्यान लगाए। आज चीन विश्व की ताकत के रूप में तब्दील हो रहा है। हमारे देश की पॉलिसी तो बहुत अच्छी होती है लेकिन उसका क्रियान्वयन बेहतर नहीं हो पता है। हमारे देश में स्क्रू ड्राइवर टेक्नोलॉजी खूब चल रही है। एक बड़ी समस्या यह है कि हम लोग रिस्क नहीं लेना चाहते हैं। हमारा इनोवेशन एप और स्विगी जैसी चीजों पर जाकर रुक जाता है। यदि हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं होगी तो हमारे देश की ताकत नहीं बनेगी।
अपनी बात को स्पष्ट करते हुए उदाहरण देकर शर्मा ने कहा कि अमेरिका ने हम पर 50% टैरिफ लगाया था जो आज तक बरकरार है। अमेरिका ने चीन पर 148 प्रतिशत टैरिफ लगाया था जिसे 15 दिन में घटाकर 10% कर दिया। अब हालात यह है कि हमारे देश में भी बहुत सारा माल चीन से बनकर आता है और हम केवल अपना ठप्पा लगाकर उसे बेच देते हैं। देश की विदेश नीति का सबसे बड़ा नुकसान व्हाट्सएप विश्वविद्यालय ने किया है। इस विश्वविद्यालय के द्वारा जिस तरह की अधकचरा जानकारी जारी की जाती है वह वैश्विक स्तर पर भारत को बहुत नुकसान पहुंचती है। अब वह समय है जब हम चीन के साथ मिलकर काम करें और अपने उद्योग तथा डिफेंस सेक्टर को मजबूत करें। इस विश्व में कोई भी रिश्ता स्थाई नहीं होता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता न्यायमूर्ति इस श्रीवास्तव ने की। कार्यक्रम का संचालन अशोक कोठारी ने किया। अतिथियों का स्वागत वल्लभभाई पटेल शिवाजी मोहिते चंद्रशेखर बोबरा ने किया। अतिथि को स्मृति चिन्ह पूर्व राज्यपाल न्यायमूर्ति वीएस कोकजे ने भेंट किया। अंत में आभार प्रदर्शन अभ्यास मंडल के अध्यक्ष रामेश्वर गुप्ता ने किया।

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