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इंदौर

सर्दियों में बच्चों की सेहत पर फोकस: इंदौर में डाबर च्यवनप्राश का जागरूकता अभियान

डाबर च्यवनप्राश

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सर्दियों में बच्चों की सेहत पर फोकस: इंदौर में डाबर च्यवनप्राश का जागरूकता अभियान

इंदौर। सर्दी भारत में सबसे ज़्यादा पसंद किए जाने वाले मौसमों में से एक है, लेकिन यह मौसम सर्दी-खांसी और सांस से जुड़ी समस्याओं जैसी कई बीमारियाँ भी लेकर आता है। ये बीमारियाँ आमतौर पर कमज़ोर इम्यूनिटी के कारण होती हैं। च्यवनप्राश लगभग 3000 साल पुराना, जाना-माना आयुर्वेदिक फ़ॉर्मूला है, जो इम्यूनिटी बढ़ाने और रोज़मर्रा के संक्रमण जैसे खांसी-ज़ुकाम से बचाव में सहायक माना जाता है।

डाबर च्यवनप्राश द्वारा इस विशेष जागरूकता अभियान की शुरुआत आज इंदौर के कर्नाटक विद्या निकेतन स्कूल।में आयोजित एक स्पेशल सेशन के साथ की गई, जिसमें 250 से अधिक बच्चों ने भाग लिया। इस अवसर पर प्रधानाध्यापिका – श्रीमती लता ओझा एवं डाबर इंडिया के दिनेश कुमार उपस्थित रहे। इस सेशन का उद्देश्य बच्चों को सर्दियों में बीमारियों से लड़ने के लिए जागरूक करना था। बच्चों को बेसिक हाइजीन, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली के माध्यम से इम्यूनिटी बढ़ाने के तरीकों की जानकारी भी दी गई।

इस अवसर पर श्रीमती लता ओझा , प्रधानाध्यापिका, कर्नाटक विद्या निकेतन स्कूल इंदौर ने कहा, “मौसम बदलने के दौरान तापमान में अचानक बदलाव से खांसी, जुकाम और फ्लू जैसी बीमारियाँ बढ़ जाती हैं। इनसे बचाव के लिए मज़बूत इम्यूनिटी बेहद ज़रूरी है। डाबर च्यवनप्राश जैसी पहल बच्चों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी है।”

इस मौके पर डाबर इंडिया लिमिटेड के हेल्थकेयर डायरेक्टर श्री श्रीराम पद्मानाभन ने कहा, “डाबर च्यवनप्राश पिछले 100 से अधिक वर्षों से हर भारतीय को मज़बूत इम्यूनिटी देने के लिए प्रतिबद्ध है। यह पहल उसी प्रतिबद्धता का एक महत्वपूर्ण कदम है। हर साल ठंड की लहर से होने वाली स्वास्थ्य समस्याएँ चिंता का विषय रहती हैं। इस अभियान के ज़रिए हम ज़रूरतमंद बच्चों को न केवल च्यवनप्राश उपलब्ध कराएंगे, बल्कि उन्हें इम्यूनिटी के महत्व के प्रति भी जागरूक करेंगे।”

इस अभियान के तहत डाबर च्यवनप्राश ने देश के 21 शहरों— आगरा, वाराणसी, कानपुर, भोपाल, लखनऊ, इंदौर, जयपुर, भुवनेश्वर, कोलकाता, सिलीगुड़ी, पटना, रायपुर, पुणे, औरंगाबाद, हैदराबाद, मैसूर, मुंबई, नागपुर, ग्वालियर और चंडीगढ़ — में प्रमुख NGOs के साथ साझेदारी की है, ताकि अधिक से अधिक बच्चों तक यह जागरूकता पहुँचाई जा सके।

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