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इंदौर

युगप्रवर्तक डॉ. हेडगेवार’ का मंचन इंदौर में 27 से

युगप्रवर्तक डॉ. हेडगेवार’ का मंचन

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‘युगप्रवर्तक डॉ. हेडगेवार’ का मंचन

श्री गुरूजी सेवा न्यास इंदौर द्वारा अभिनव आयोजन

इंदौर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन पर आधारित प्रेरक नाट्य ‘युगप्रवर्तक डॉ. हेडगेवार’ का मंचन इंदौर में 27-28-29 मार्च को ‘माधव सृष्टि’ श्री गुरूजी सेवा न्यास, बॉम्बे हॉस्पिटल के पीछे इंदौर में प्रतिदिन रात्रि 07 से 09:30 आयोजित होगा । श्री गुरूजी सेवा न्यास द्वारा आयोजित इस नाटक में डॉ. हेडगेवार के जीवन के प्रेरक प्रसंगों का प्रदर्शन किया जाएगा।

श्री गुरूजी सेवा न्यास के सचिव संदीप जमींदार ने बताया कि डॉ. हेडगेवार ने भारत की हजारों वर्षों की गुलामी के पश्चात राष्ट्र को संगठित करने का संकल्प लिया था। वे कांग्रेस से जुड़े रहे और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई। 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना कर उन्होंने समाज को एकता, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम की भावना से जोड़ने का कार्य किया।

नाटक ‘युगप्रवर्तक डॉ. हेडगेवार’ में उनके जीवन के महत्वपूर्ण प्रसंगों को मंच पर जीवंत किया जाएगा। इसमें स्वतंत्रता आंदोलन के गरम दल और अहिंसक विचारधारा के टकराव, हिंदू समाज की निष्क्रियता, डॉ. हेडगेवार पर लगे राजद्रोह के मुकदमे, तिलकजी, योगी अरविंद और सावरकर से प्राप्त वैचारिक प्रेरणाओं को प्रभावशाली अभिनय के माध्यम से जन्म से लेकर अवसान तक की यात्रा प्रस्तुत की जाएगी ।

नाटक में दिखाया जाएगा कि कैसे डॉ. हेडगेवार ने संगठन के शाश्वत स्थायित्व की परिकल्पना की और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नींव रखी। साथ ही सुभाषचंद्र बोस के मन में सैनिकी संगठन की प्रेरणा और संघ के चरित्र निर्माण की प्रक्रिया को भी मंच पर दर्शाया जाएगा।

इस नाट्य को नागपुर के सुप्रसिद्ध नाट्य मंच “नाद ब्रह्म” द्वारा प्रस्तुत किया जायेगा तथा नागपुर से 50 कलाकारों द्वारा इसका मंचन किया जायेगाl मंचन में लाइट, साउंड एवं अत्याधुनिक तकनीक का समावेश किया जायेगा जिससे नाट्य प्रस्तुति जीवंत प्रतीत होगीl

संयोजक मनीषी श्रीवास्तव ने बताया कि कि यह यह नाटक प्रतिदिन एक शो तथा कुल तीन दिन दिखाया जायेगा, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक डॉ. हेडगेवार के विचार और राष्ट्र निर्माण की भावना पहुँच सके।

यह नाट्य प्रस्तुति न केवल ऐतिहासिक संदर्भों का पुनर्पाठ है, बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है, जो संगठन, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति के आदर्शों पर आधारित है।

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