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इंदौर

भारत के कपास भविष्य को सुरक्षित करने की बड़ी पहल

इंदौर में रिजेनएग्री फास्ट ट्रैक कॉटन सम्मेलन में देश–दुनिया के एक्सपर्ट का संगम

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भारत के कपास भविष्य को सुरक्षित करने की बड़ी पहल
इंदौर में रिजेनएग्री फास्ट ट्रैक कॉटन सम्मेलन में देश–दुनिया के एक्सपर्ट का संगम

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इंदौर, ।भारत के कपास किसानों को जलवायु संकट से बचाने और कपास क्षेत्र को पुनर्योजी कृषि की ओर तेज़ी से मोड़ने के उद्देश्य से इंदौर में एक महत्वपूर्ण बहु-हितधारक सम्मेलन आयोजित किया गया। “Seeding the Future: The Regenagri Fast Track Cotton Initiative” थीम पर आधारित इस सम्मेलन में देश-विदेश के प्रमुख ब्रांड्स, उद्योग जगत के नेता, प्रमाणन संस्थान, सामाजिक संगठन और किसान समूह बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभी ने मिलकर भारत के कपास उत्पादन को टिकाऊ, जलवायु-सहिष्णु और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का साझा रोडमैप तैयार किया।
सम्मेलन के दौरान Solidaridad Asia और WWF–India द्वारा लॉन्च की गई Regenagri Fast Track Cotton Initiative को विशेष रूप से सराहा गया। इस पहल के तहत 6 मिलियन यूरो के लक्ष्य वाले फंड के माध्यम से 1 मिलियन हेक्टेयर भूमि पर पुनर्योजी खेती का विस्तार, 1 मिलियन किसानों और मजदूरों की आय व जलवायु-सहिष्णुता में सुधार, तथा 2 मिलियन टन रेजनएग्री प्रमाणित कपास के वैश्विक बाज़ार को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है। यह पहल भारत को विश्व स्तर पर सस्टेनेबल कॉटन का अग्रणी देश बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपास उत्पादक देश है, लेकिन लगातार बदलते मौसम, गहन रासायनिक खेती और सीमित संसाधनों के कारण छोटे किसान गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में पुनर्योजी कृषि एक नई उम्मीद बनकर सामने आई है, जो मिट्टी की सेहत सुधारने, लागत घटाने, उपज बढ़ाने और जैव-विविधता की रक्षा करने में कारगर साबित हो सकती है। इंटरक्रॉपिंग, कवर क्रॉपिंग, मल्चिंग और एग्रोफॉरेस्ट्री जैसी पद्धतियाँ कपास उत्पादन को भविष्य के अनुरूप मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
सम्मेलन में उपस्थित विशेषज्ञों ने इस पहल को भारत की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए परिवर्तनकारी बताया। Solidaridad Asia के प्रबंध निदेशक डॉ. शतद्रु चट्टोपाध्याय ने कहा कि यह पहल किसानों के लिए मूल्य-वृद्धि और बेहतर बाज़ार अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगी, वहीं WWF–इंडिया के श्री मुरलीधर ने इसे जलवायु संकट से जूझते किसानों के लिए समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। Regenagri CIC के डॉ. राजेश दुबे ने कहा कि यह प्रयास भारत में जलवायु-सहिष्णु कपास उत्पादन को नई गति देगा, जबकि Control Union के श्री डिर्क टाइशर्ट ने वैश्विक बाज़ार में भारत की बढ़ती भूमिका के प्रति विश्वास व्यक्त किया। SOPA के कार्यकारी निदेशक श्री डी.एन. पाठक ने कहा कि पुनर्योजी कृषि केवल पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने का सुनहरा अवसर है।
इंदौर में हुआ यह सम्मेलन कपास उत्पादन के भविष्य को पुनर्परिभाषित करने वाला साबित हुआ। सभी हितधारकों ने एक स्वर में स्वीकार किया कि अब समय सिर्फ कपास उगाने का नहीं, बल्कि भूमि, किसान और अर्थव्यवस्था—तीनों को सुरक्षित करने का है। रेजनएग्री फास्ट ट्रैक कॉटन पहल आने वाले वर्षों में भारत को जलवायु-सुरक्षित और टिकाऊ कपास उत्पादन का वैश्विक नेता बनाने की क्षमता रखती है।

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