
नर्मदा साहित्य मंथन- भारत उदय
गांवों के विकास के बिना भारत उदय की परिकल्पना संभव ही नहीं है – अभय महाजन
द्वितीय सत्र
गांव से भारत उदय
इंदौर । दीनदयाल शोध संस्थान के प्रमुख अभय महाजन ने कहा कि गांवों के विकास के बिना भारत उदय की परिकल्पना संभव ही नहीं है। गांवों में भारत की आत्मा बसती है। भारत की असली पहचान ही उसके गांव है, इसलिये राष्ट्र निर्माण की शुरुआत गांवों से ही होती है। ग्राम को संस्कारवान, आत्मनिर्भर और स्वालंबी करना होगा, तभी भारत उदय का सपना साकार होगा। गांवों में भारतीय संस्कृति, परंपरा और सामाजिक समरसता आज भी जीवित है, जो राष्ट्र की शक्ति है। आज जरूरत इस बात की है कि गांवों में कोई गरीब, बेकार और अस्वस्थ नहीं हो। गांवों के युवाओं को शिक्षित करने की जरूरत है। यह भी देखना होगा कि गांवों में किसी तरह का कोई विवाद नहीं हो। वास्तव में देखा जाए तो यही ग्रामोदय है। ग्रामोदय की सफलता सामाजिक समरसता और आपसी सौंहार्द पर निर्भर करती है। यदि गांव विवादों, भेदभाव और वैमनस्य से ग्रस्त रहेगा तो विकास स्थायी नहीं हो सकता है। गांवों को गरीबी मुक्त, रोजगार युक्त भी बनाना होगा। महाजन ने कहा कि नानाजी का ध्येय वाक्य ही था कि खुद के लिये नहीं, दूसरों के लिये जिये। हमें भी अपने लिये नहीं बल्कि अपनों के लिये जीना चाहिये और मेरे अपने भी वे ही है जो पीड़ित, वंचित है। यदि हमने अपनों की परिभाषा को समझ लिया तो सामाजिक ताना-बाना ही पूरी तरह बदल जाएगा। नानाजी देखमुख को आपने आदर्ष व्यक्तित्व बताया।



