
रसिया कार्नर इंदौर की गेर एक पारंपरिक रंगपंचमी उत्सव 8 मार्च को
रसिया कार्नर इंदौर गेर का 53 वां वर्ष
इंदौर। (विनोद गोयल) रसिया कार्नर इंदौर की गेर एक पारंपरिक रंगपंचमी उत्सव है। जो कि अब इंदौर का सांस्कृतिक और पारंपरिक आयोजन बन चुका है। हर वर्ष होली के पाचंवे दिन रंगपंचमी के त्यौहार पर “गेर” निकलती है। इंदौर में पांच गेर निकलती है जो मानों चारों दिशाओं से आने के बाद एक हो जाती है। इंदौर में वर्षों पूर्व एक गेर निकलती थी। इसके बाद रसिया कार्नर की गेर निकालने की शुरूआत हुई। जिसे नाम दिया गया रसिया कार्नर, रसिया जिसे भगवान कृष्ण के नाम पर रखा गया है।
53 वें वर्षों से बढ़ा रही इंदौर की शोभा
इंदौर शहर में 53 वर्षों पूर्व रसिया कार्नर की गेर का आगाज हुआ था। वर्तमान में गेर के संयोजक राजपाल जोशी ने बताया कि स्वं पंडित रमेश जोशी और उनके मित्र प्रेम शर्मा ने इसकी शुरूआत की थी। इससे पहले टोरी कार्नर और संगम कार्नर की गेर शहर में निकलती थी। वहां पर हुए मनमुटाव के बाद उन्होने अपने अन्य मित्रों,युवाओं और रहवासियों से अपनी अलग गेर निकालने की बात कही। जिस पर सभी की सहमति के बाद रसिया कार्नर की गेर का आगाज हुआ।
इस वर्ष धूमधान से निकलेगी रसिया कार्नर गेर संयोजक राजपाल जोशी ने बताया कि इस वर्ष भी प्रतिवर्षोनुसार गेर ओल्ड राज मोहल्ला स्थित हरिराम मंदिर से शुरू होगी। पिछले वर्ष सन 2025 में घर में गमी के कारण गेर नहीं निकाल पाए थे। रसिया कार्नर की गेर अपने पारंपरिक रूट पर निकलेगी। ओल्डराजमोहल्ला से गेर टोरी कार्नर पहुंचेगी।
मां अहिल्या को करेंगे भगवा प्रणाम -गेर मार्ग खजुरी बाजार से होते हुए राजवाड़ा पहुंचेगी जहां मां अहिल्या को भगवा प्रणाम किया जाएगा इसके बाद गेर वापस अपने कांच मंदिर से अपने प्रांरभिक स्थल पर पहुंचेगी।
30 फीट की मार वाली मिसाइल से उडेगा रंग –गेर में कुछ नया करने का चलन हर बार रहता है। गेर की गोल्डन जुबली पर रसिया कार्नर की गेर में हेलमेट पहन कर यातायात नियमों के पालन का संदेश दिया गया था। इस वर्ष पांच टैंकर गेर में शामिल होगें जिसमें 30 फीट से अधिक की मार वाली मिसाइल से रंग उडाया जाएंगा।
बैलगाड़ियों उड़ाया जाता था रंग – वर्तमान गेर में आधुनिक टैंकर और मिसाइलों के प्रयोग से रंग उड़ाया जाता है। पहले गेर में बैलगाड़ियों पर रंगराड़े रख कर गेर में शामिल लोगों पर रंग डाला जाता था।
महिलाओं की सहभागिता बढ़ी – इंदौर शहर में परंपराओं को बड़े ही उल्लास के साथ मनाया जाता है। समय के साथ अब गेर में अब महिलाओं की सहभागिता भी रहती है। पहले के समय में महिलाएं गेर में शामिल नहीं होती थी। लेकिन वर्तमान दौर में महिलाएं भी बढ़चढ़ कर गेर में शामिल होती है।
लगभग 7 लाख लोग होते हैं गेर में शामिल –गेर में अब लोगों का उत्साह बढ़ रहा है। इंदौर की पारंपरिक गेर में शामिल होने के लिए अन्य शहरों से भी लोग यहां पहुंचते है। कई परिवार में अपने रिश्तेदारों को भी गेर देखने के लिए बुलाया जाता है। अब इंदौर की गेर सिर्फ इंदौर शहर तक ही शामिल नहीं है अपितु अन्य शहरों तक भी गेर का उत्साह पहुंच चुका है।
आसामाजिक तत्व बढ़ाते है परेशानियां –गेर में जहां अन्य शहरों तक उत्साह पहुंचा है यहीं आधुनिक हुई गेर में कई बार असामाजिक तत्व भी सक्रिय हो जाते है जो गेर में हुड़दंग मचा कर गेर को बदनाम करने का प्रयास भी करते है। इसको लेकर रसिया कार्नर की गेर में सुरक्षा की दृष्टि से भी कई लोगों को सुरक्षा की कमान सौंपी जाती है। सभी गेर संचालक अपने अपने वालंटियर भी रखते है।
प्रशासन करता है व्यापक सुरक्षा व्यवस्था– गेर संयोजक राजपाल जोशी ने बताया कि गेर की परंपरा को कायम रखने में प्रशासन व्यापक सुरक्षा व्यवस्था सहित अपनी मुस्तैदी रखता है और इतनी जनता के प्रबंधन को प्रशासन बहुत अच्छी तरह से संभालता है। यह इंदौर प्रशासन की भी बडी उपलब्धि है कि वह भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को रखते हुए परंपरा और उत्साह को बरकरार रखता है। यहीं इंदौर नगर निगम भी गेर के बाद जिस तरह से पुरे गेर मार्ग की सफाई करता है वह हमारी नगर निगम और सफाईकर्मियों की मेहनत का ही फल है कि इंदौर अपनी परंपरा कायम रख पाता है



