सेंधवा: सरस्वती शिशु मंदिर की छात्राओं ने सैनिकों के लिए भेजी हाथ से बनी 1100 राखियाँ
जम्मू-कश्मीर तक जा रही संजीवनी युवा प्रतिष्ठान की 'राखी सम्मान यात्रा' का सेंधवा में युवाओं, महिलाओं और बच्चों ने भावुक स्वागत कर राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया

सेंधवा। सत्याग्रह लाइव।
‘एक राखी जवानों के नाम’ यात्रा के अंतर्गत बुधवार रात सेंधवा में ‘राखी सम्मान रथ’ का उत्साहपूर्वक स्वागत किया गया। सरस्वती शिशु मंदिर की छात्राओं ने देश के जवानों के लिए 1100 राखियाँ भेंट कीं, वहीं विभिन्न सामाजिक संगठनों ने पुष्पवर्षा कर अभिनंदन किया।
महाराष्ट्र के शिर्डी से जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर तक ‘एक राखी जवानों के नाम’ अभियान के तहत निकल रही राखी सम्मान यात्रा का बुधवार रात 8 बजे सेंधवा नगर में प्रवेश हुआ। संजीवनी युवा प्रतिष्ठान द्वारा संचालित इस रथयात्रा का उद्देश्य देशभर की बहनों द्वारा बनाई गई राखियों को सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात जवानों तक पहुंचाना है।

यात्रा का उत्साहपूर्ण स्वागत
सेंधवा में मनसा माता मंदिर पर पूर्व पार्षद संजीव चौधरी, भाजपा प्रवक्ता सुनील अग्रवाल, गणेश नरगावे, गोपाल भामरे सहित बड़ी संख्या में युवाओं ने “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम” और “आर्मी जिंदाबाद” के नारों के साथ यात्रा का स्वागत किया। पुष्पवर्षा और देशभक्ति गीतों के बीच माहौल भावनात्मक बन गया।
रक्षाबंधन की सौगात लेकर छात्राओं ने भेजीं 1100 राखियाँ
गुरुवार सुबह सरस्वती शिशु मंदिर में छात्राओं ने रथ के साथ चल रहे युवाओं को राखियाँ बांधकर देश के वीर जवानों के लिए हाथ से बनाई गई 1100 राखियाँ भेंट कीं। इस दौरान स्कूल प्रबंधक विकास आर्य का शाल ओढ़ाकर सम्मान किया गया। आर्य ने कहा, “हमारी बहनों की राखी वीर जवानों तक पहुँचे, यही गर्व की बात है।”
नगर के विभिन्न स्थानों पर हुआ स्वागत
दारूगोदाम पर नपा अध्यक्ष बसंती बाई यादव ने महिलाओं के साथ रथ का स्वागत किया। भवानी चौक पर सार्थक ग्रुप के साथ सचिन शर्मा, निलेश जैन ने, पुराने बस स्टैंड पर डॉ. गिरीश गुप्ता, सुभाष गोयल ने यात्रा को भावनात्मक समर्थन दिया।
यात्रा का उद्देश्य और संकल्प
भाजपा प्रवक्ता सुनील अग्रवाल ने बताया कि यह यात्रा विवेक भैय्या कोल्हे की संकल्पना से प्रेरित है और पिछले 5 वर्षों से संचालित की जा रही है। इस वर्ष ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत 1 लाख से अधिक राखियों को सीमावर्ती इलाकों में जवानों तक पहुंचाया जाएगा।
यात्रा की शुरुआत शिर्डी स्थित साई बाबा मंदिर में चरण स्पर्श से हुई और यह रक्षाबंधन तक सीधे श्रीनगर पहुंचकर सैनिकों को राखियाँ सौंपेगी। यह पहल जवानों के बलिदान, निष्ठा और देशप्रेम को सलाम करने का भावनात्मक प्रतीक बन गई है



