
स्वबोध से ही भारत सोने का शेर बन सकेगा।
स्वबोध से भारत बनेगा सोने का शेर

इंदौर। केरल के राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर ने तीन दिवसीय नर्मदा साहित्य मंथन का उद्घाटन करते हुए कहा कि स्वबोध से ही भारत सोने का शेर बन सकेगा। पहले के समय में कहा जाता था कि भारत सोने की चिड़िया रहा है। आज भी कहा जाता है कि हमें भारत को फिर से सोने की चिड़िया बनाना है। मैं इस बात से सहमत नहीं हूं। हमने देखा है कि जब भारत सोने की चिड़िया होता है तो लूटमार होती है आक्रमण होते हैं इसलिए हमें भारत को सोने की चिड़िया नहीं सोने का शेर बनाना है। देश के आजादी के बाद हम अपने स्व के बोध को भूल गए। विकास और पुनर्वेभव की कल्पना तो हम करते रहे लेकिन यह कैसे आएगा इसका कोई मार्ग हम लोगों को मालूम नहीं था। भारत उदय तभी होगा जब हम अपने मन में आने वाले विचार पर मंथन करेंगे। देश की आजादी के बाद से पूरा विश्व हमारे देश को देख रहा था। हमारी तत्कालीन सरकार कभी सोशलिस्ट तो कभी कैपीलिस्ट देश के आगे पीछे रही। हमारे देश के नागरिकों के मन से स्वबोध गायब हो गया था कौन मेरा हमने अपनी शिक्षा नीति को भी अपने उज्जवल अतीत के हिसाब से आकर नहीं दिया उसका यह परिणाम हुआ कि आज हम पूरी तरह से स्वस्थ को भूल गए हैं। हमारे मन से स्वदेश , स्वभाषा, स्व संस्कृति, स्व इतिहास व स्व परंपरा चले गए और हमें विदेशी परंपराएं अच्छी लगने लगी। विकसित भारत केवल आर्थिक पैमाने से नहीं बनेगा बल्कि समग्र विकास की कल्पना से बनेगा। इसमें देश का नागरिक केवल स्वदेशी को अपनाकर अपना पूर्ण योगदान दे सकता है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम जिन वस्तुओं का उपयोग कर रहे हैं वह पूरी तरह से स्वदेशी है। हनुमत पीठ अयोध्या के पीठाधीश आचार्य मिथलेश शरण नंदिनी महाराज, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्य क्षेत्र संघचालक डॉ पूर्णेन्द्र सक्सेना, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ राकेश सिंघाई, विश्व समाज केंद्र,मालवा के अध्यक्ष दिनेश गुप्ता, नर्मदा साहित्य मंथन के संयोजक श्रीरंग पेंढारकर उपस्थित थे।



