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वन विभाग बनाम डॉक्टर; मृत जानवर की पहचान को लेकर सेंधवा में गरमाया मामला

सियार या पालतू कुत्ता? सेंधवा में जानवर की पहचान पर छिड़ा विवाद

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सेंधवा। एक मृत जानवर की पहचान को लेकर सेंधवा में वन विभाग और एक स्थानीय नागरिक के बीच विवाद गहरा गया है। सवाल यह है कि क्या मरी हुई वह मादा सियार थी या किसी की पालतू जर्मन शेफर्ड?

एक मृत जानवर की पहचान को लेकर सेंधवा में वन विभाग और स्थानीय आयुर्वेदिक चिकित्सक के बीच टकराव सामने आया है। यह मामला शुक्रवार सुबह उस समय शुरू हुआ जब बारद्वारी स्थित फिल्टर प्लांट रोड पर एक मादा जानवर मृत अवस्था में मिला।
वन विभाग के अनुसार, जानवर की पहचान मादा सियार के रूप में की गई और उसे अज्ञात वाहन की टक्कर से मृत घोषित कर पोस्टमार्टम के बाद ग्राम सालीकला जंगल में अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस संबंध में रेंजर मोहन सिंह मंडलोई ने शनिवार को पशु चिकित्सालय से जारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट दिखाते हुए कहा कि वन्य जीव चिकित्सक द्वारा पुष्टि के बाद अंतिम विधि की गई है। उन्होंने कहा कि मृत जानवर सियार ही था।

वहीं, डॉ. गंगाराम सिंगोरिया ने दावा किया कि मृत जानवर उनकी 12 वर्षीय जर्मन शेफर्ड पालतू कुतिया “डेल्फी” थी, जो गुरुवार रात पटाखों की आवाज से डरकर उनके नवलपुरा स्थित स्कूल परिसर से भाग गई थी। सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरें देखकर जब वे मौके पर पहुंचे तो अंतिम संस्कार हो चुका था।

इस घटनाक्रम ने शहरवासियों में जिज्ञासा और भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। एक ओर जहां डॉक्टर अपनी पालतू कुत्ते की मौत पर दुख व्यक्त कर रहे हैं, वहीं विभाग इसे वन्य जीव की नियमित कार्रवाई बता रहा है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में जानवर को मादा सियार बताया गया है, लेकिन डॉक्टर इसे अपनी पालतू कुत्ते के रूप में पहचानने की बात पर कायम हैं।

 

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पशु चिकित्सालय की पीएम रिपोर्ट में मृत जानवर को सियार बताया गया है।

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