सिंडिकेट के एकाधिकार को खत्म करने लिए सरकार की इस बार शराब नीति की नई पॉलिसी, 570 करोड़ के होगे जिले के ठेके।
21 ग्रुपों की 88 दुकानों की होना है पहले चरण की टेंडर प्रकिया शुरू। 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी। सात सात दुकानों की बनाए गुप।

आशीष यादव धार।
सरकार की इस बार की शराब नीति के बदलाव के चलते ठेकेदारों को चिंता में ला दिया है। क्योंकि इस बार शराब महेगी होने के साथ ही जिले में ठेकेदारो के एकाधिकार को खत्म करने के लिए जिले की 88 दुकानों को 21 ग्रुपों में जोड़ा है। नई शराब नीति में बड़ा बदलाव, अब हर दुकान पर होगी सरकार की नजर रहेंगी। वही मध्य प्रदेश में नई आबकारी नीति-26-27 बदलाव के साथ एक अप्रेल से लागू होगी। जिले में दुकानों की नीलामी प्रक्रिया शुरू हो गई। वही पहले चरण के लिए आवेदन के लिए आज आखिरी दिन है। साथ दुकानों को 20 फीसदी बढ़ोतरी के साथ दुकानें दी जायेगी। साथ ही इसमें निर्देश दिए गए।आबकारी विभाग संशोधित शराब नीति जारी करने के बाद कई नवाचार कर रहा है। वही इसबार जिले में आबकारी विभाग को एक अच्छे राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है। वही इस बार जिले में बड़े ठेकेदारों में से इस बार भी पुराने चावलों के साथ नए चावल भी मैदान में होगे साथ अन्य छोटे ठेकेदार भाग लेगे।

एकाधिकार व बड़े ठेकेदारो का वर्चस्व खत्म करना:
इसबार जिले में बड़े ठेकेदारों के वर्चस्व को कम करने के लिए और छोटे ठेकेदारों को मौका देने के लिए जिले में अधिक से अधिक समूह बनाने और उसी के तहत ई-टेंडर पर ठेक होना है। आबकारी विभाग का मानना है कि इससे राजस्व बढ़ेगा और व्यवस्था पारदर्शी बनेगी, लेकिन इससे शराब भी महंगी होगी और इसका असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। कुल मिलाकर शराब की प्राथमिकता सुधार से अधिक राजस्व लक्ष्य पूरा करने पर केंद्रित दिख रही है। वही 27 फरवरी से ई-टेंडर ऑनलाइन होगे और 2 मार्च को ई-टेंडर ऑक्शन प्रपत्र खुलेंगे और शाम साढ़े 5 बजे तक यह प्रक्रिया जारी रहेगी। इसी तरह पहले चरण के दूसरे बैच के ई-टेंडर की प्रक्रिया 3 मार्च से शुरू होगी, जो कि 5 मार्च को शाम तक सम्पन्न की जाएगी और बैच 3 की ई-टेंडर प्रक्रिया आबकारी महकमा 6 मार्च से शुरू कर 7 मार्च की शाम तक जारी रखेगा। पूरे प्रदेश में सबसे महंगा ठेका इंदौर जिले का ही रहता है, जिससे इस बार 3 हजार करोड़ से अधिक की आमदनी संभव है। वही धार जिला भी एक बड़े जिलों में शामिल हैं।
पांच बार देगा विभाग समझाइश फिर होगा लाइसेंस निरस्त:
इस बार शराब नीति में नया नियम लया गया जो दुकान अगर पांच बार से ज्यादा नियम की नियमों की अनदेखी करता हे तो उसका लाइसेंस निरस्त किया जायेगा। साथ ही 21 ग्रुपों को तीन चरणों में बाटा गया है तीनों चरण पूर्ण होने के बाद टेंडर प्रक्रिया खोली जाएगी। जिले में 6 करोड़ का सबसे छोटा गुप हे तो बड़े गुप में 68 करोड़ रुपए की दुकानों भी रहेगी साथ इस बार ग्रुपों को कैटेगरी के हिसाब से भी बांटा गया है। वर्तमान में समूह आधारित नीलामी की व्यवस्था लागू है। यह व्यवस्था प्रतिस्पर्धा के बजाय ठेका सिंडिकेट संस्कृति को बढ़ावा देती है। इससे शराब कारोबार कुछ चुनिंदा समूह के हाथों सिमट जाता है। पिछले वर्षों में शराब एमआरपी से अधिक दर पर बिकने, देसी शराब की कमी और स्टॉक मैनेजमेंट में गड़बड़ी की शिकायतें लगातार की गईं। आबकारी विभाग द्वारा कई ठेकेदारों पर करोड़ों रुपये की पेनाल्टी भी लगाई गई है लेकिन कोई खास सुधार नहीं दिखा है।

इसबार 570 करोड़ का हुआ जिला:
दरअसल पिछले वित्तीय वर्ष में जिले की शराब दुकानों के एकल समूह से 475 करोड़ रूपए के राजस्व की प्राप्त हुई थी। धार अब 570 करोड़ का राजस्व देने वाला जिला बन जाएगा। नई नीति के तहत वर्तमान ठेकेदार ही शराब की दुकानों पर 20 प्रतिशत की वृध्दि कर दुकानों को टेंडर प्रकिया से दिया जायेगा। इस साल जिले की दुकानों से 570 करोड़ रूपए के राजस्व प्राप्त होनी की उम्मीद है। सहायक आबाकरी आयुक्त राजनारायण सोनी ने बताया कि इस बार 21 समूह के माध्यम से दुकानों को दी जायेगी। नवीनीकरण के लिए आवेदन शुरू हो गए जो तीन चरण में होगे पहले चरण का आज आखिरी दिन है। तीनो चरणों के आवेदन होने के बाद नवीनीकरण व लॉटरी आवेदनों को निष्पादन की कार्यवाही की जाएगी। विभागीय पोर्टल के माध्यम से इच्छुक व्यक्ति संबंधित दस्तावेजों के साथ निर्धारित शुल्क का भुगतान कर पंजीयन कर सकता है।
ई-आबकारी पोर्टल पर होगा रजिस्ट्रेशन:
आबकारी विभाग ने शराब दुकानों की नीलामी में भाग लेने के लिए ठेकेदारों को रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य होगा। एक बार रजिस्ट्रेशन हो गया तो वेरिफिकेशन स्लिप दिखाकर प्रदेश में कहीं भी नीलामी में भाग ले सकते हैं। अब तक बार-बार डॉक्यूमेंट देने होते हैं। विभाग द्वारा ट्रेनिंग भी दी गई। इसके लिए ठेकेदार आवेदन भी कर रहे हैं। वेरिफिकेशन के बाद ही ठेकेदारों का रजिस्ट्रेशन होगा। एक बार रजिस्ट्रेशन हो गया तो उससे मिली वेरिफिकेशन स्लिप से प्रदेश में कहीं भी ठेकेदार शराब दुकानों की नीलामी में प्रक्रिया में शामिल हो पाएंगे। इस वजह से नीलामी का समय भी कम होगा।
88 दुकानों के 21 ग्रुप बनाया :
पिछले बार धार जिले में 88 शराब दुकानो को तोड़कर एक ग्रुप बनाया था। पिछले साल इन शराब दुकानों से 475 करोड़ रुपए का राजस्व हासिल हुआ था। वही वित्तिय वर्ष निष्पादन टेंडर के माध्यम से किया जाएगा। नई नीति के तहत यदि मौजूदा ठेकेदार 20 प्रतिशत अधिक शुल्क चुकाने के साथ दुकानें दी जायेगी। वही सूत्र बताते हेकि इसबार जो ग्रुप बनाए गए हैं वह गुजरात लाइन को जोड़कर भी देखे जा रहे हैं। वही जो अवैध शराब जिले व अन्य जिलों से आती हे वह धार जिले से निकल गुजरात में अवैध बिक्री होती है। वही जिले में तीन हजार से अधिक अवैध शराब बिक्री प्रखंड दर्ज जिले में होंगे
पीओएस मशीनों से शराब बिक्री:
आबकारी विभाग ने शराब की बिक्री को अधिक पारदर्शी बनाने और काले धन की रोकथाम के लिए पाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनों का उपयोग अनिवार्य कर दिया है। इसके तहत, अब सभी शराब दुकानों को पीओएस मशीन के माध्यम से ही शराब की बिक्री करनी होगी, ताकि हर एक बिक्री का रिकॉर्ड रखा जा सके। इससे बिक्री की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी और सरकार को भी इस पर नियंत्रण रखना आसान होगा। इससे टैक्स चोरी रोकने में मदद मिलेगी। साथ ही, यह भी पता चल सकेगा कि कौन सी दुकान कितनी शराब बेच रही है। बार कोड को स्कैन करने के बाद ही शराब की बिक्री कर सकेंगे, साथ ही बिल भी देना होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर पहले तीन बार में 25 हजार का जुर्माना लगाया जाएगा।
ई-बैंक गारंटी की अनिवार्यता:
आबकारी विभाग ने शराब दुकानों के लिए ठेकेदारों को बैंक गारंटी देने के नए नियम भी जारी किए हैं। एक अप्रैल से लागू होने वाली नई नीति के तहत, शराब दुकानों के लिए लाइसेंस लेने वाले ठेकेदारों को ई-बैंक गारंटी के रूप में बैंक गारंटी देनी होगी। इस गारंटी की वैधता कम से कम अप्रैल 2027 तक होगी और इसे अन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग नहीं किया जा सकेगा। इस नई व्यवस्था के तहत एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) को स्वीकार नहीं किया जाएगा और न ही पहले से जमा की गई एफडी का नवीनीकरण किया जाएगा। इसके अलावा, ठेकेदारों से प्रमाणित दस्तावेज भी लिए जाएंगे, जिससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ई-बैंक गारंटी पर पहला हक केवल उस ठेकेदार के पास होगा, जिसे शराब दुकान का ठेका मिलेगा। यह गारंटी साइबर ट्रेजरी के माध्यम से जमा की जाएगी और केवल स्वीकार्य बैंकों से ई-गैरंटी ही मान्य होगी।



