बच्चों को करवाई जंगल की भ्रमण साथ ही वन्य प्राणी की जानकारी नवाचार से अनुभूति प्रशिक्षण बच्चो को समझाया जगल के बारे में।
सात रेंज में वन परिक्षेत्र में अनुभूति शिविर में 14 अनुभूति में 1687 बच्चों ने भाग लिया। विद्यार्थियों को वन भ्रमण में कराई प्रकृति की अनुभूति।

आशीष यादव धार
जंगल और वन्य जीवों का ज्ञान किताबों से ज्यादा वहां जाकर ज्यादा बेहतर ढंग से प्राप्त किया जा सकता है. इसी के चलते धार वन मंडल ने जिले की सातों रेंजों में अनुभूति शिविरों का आयोजन किया। जिसमें बच्चों के लिए एक ऐसे कैंप की शुरुआत की गई है, जहां वे जंगलों में खुद जाकर प्रकृति और वन्य संपदा को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं. इस कैंप का नाम है अनुभूति जो अपने नाम के अनुरूप बच्चों को वाइल्ड लाइफ की अनोखी अनुभूति करा रहा है.शासन द्वारा चलाए जा रहे हैं अनुभूति परीक्षण केंद्रों में बच्चों को जंगल की जानकारी दी जा रही है वनमंडल धार में वन परिक्षेत्र के अंतर्गत यह संयुक्त तत्वावधान में अनुभूति प्रशिक्षण सह जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया। मास्टर ट्रेनर के साथ शासकीय भी इसमें भाग ले रहे।
वहीं बच्चों को अनुभूति के माध्यम से बच्चों को जंगल ओर जंगल में रहने वाले जीव जंतुओं के बारे में सही जानकारी मिल सके और प्राकृतिक के प्रति उनका प्रेम जागृत हो सके।
जिले में 14 अनुभूति शिविर में 1687 बच्चों ने भाग लिया:
वन परिक्षेत्र के लगभग 5 से 10 किमी की परिधि में आने वाले शासकीय विद्यालयों के लगभग 1687 विद्यार्थियों के दल को वनभ्रमण करवा कर प्रकृति की अनुभूति करवाई जा रही है। वन मंडल धार के अंतर्गत विजयानंथम टी.आर. वन मंडल अधिकारी धार के मार्गदर्शन में 14 अनुभूति शिविर आयोजित किये गये जिसमें 1687 स्कूली छात्र, छात्राओं को वन, जैव विविधता, डायनासौर जीवाश्यम एवं पर्यावरण संरक्षण, बीज से पौधा तैयारी, वनस्पति के उपयोग, जडी बूटियों की पहचान एवं उसके उपयोग तथा वायनाकूलर, केमरा ट्रेप, कम्पास का डेमो, वन्यप्राणी आंकलन (गणना), खुरसानी ईमली के बार में विस्तार से बताया गया एवं अनुभूति थीम गाने पर आदिवासी (सांस्कृतिक) लोक नृत्य किया गया। वन विभाग द्वारा कपडे का बैग, लघु वनोपज खाद्य किट, अनुभूति पुस्तक एवं पेन, केप छात्र छात्राओ को वितरित किये गये। साथ ही मैं वन्य प्राणी का जंगल के प्रति लगाव वह जंगल का मानव के प्रति लगाओ आदि की जानकारी बच्चों को दी जा रही है। जिससे बच्चे जंगल वह अवन्य प्राणी के बारे में कुछ सीख सके। वनमंडलाधिकारी धार विजयानंथम टी.आर के निर्देश कार्यक्रम का संचालन किया गया जिसमें एसडीओ व सात रेंजर के रेंजरों के साथ समस्त स्टॉफ की सक्रिय भागीदारी रही।
जंगली जानवरों के साथ विभाग की जानकारी:
वनमंडलाधिकारी ने निर्देश पर सात रेंज में 14 अनुभूति कार्यक्रम होना है इसके लिए हर रोज रेंजवार आयोजन किया गया इसके मुख्य थीम हम धरती का दूत ‘ में हूं धरती का दूत अब अकेला नहीं के विषय में जानकारी दी के साथ तेंदुए के बारे में अनुभूति थीम सॉन्ग सुनाकर बच्चों में नई ऊर्जा का संचार किया गया। सुबह के नाश्ते के बाद विद्यार्थियों को अलग अलग दलों में बांटकर जंगल की जानकारी दे जाती थी।शिविरार्थियों को दूरबीन से पक्षी दर्शन, तितलियों का जीवन चक्र, वृक्षों का पर्यावरण में महत्व, वन्य प्राणियों की खाद्य श्रखला में भूमिका, गिद्धों का महत्व जैसे विषयों पर विस्तार से समझाया गया। चीता पुनर्स्थापन व परियोजना पर विशेष उद्बोधन किया जाता है वही नक्षत्र वाटिका के विभिन्न वृक्षों की प्रजातियों के औषधीय और पर्यावरणीय महत्व के बारे में चर्चा की गई प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भी हुई। इसमें प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। शिविर में सभी प्रतिभागियों के भोजन की व्यवस्था भी की जाती है।
धार वन विभाग का नवाचार दे रहे बच्चो को पौधा:
अनुभूति कार्यक्रम के दौरान बच्चों को जंगल के पौधों की जानकारी साझा की गई। नीलगाय, मोर,, सनबर्ड आदि की उपस्थिति बच्चों द्वारा देखी गई। आयोजन में उत्कृष्ट के छात्र -छात्राओं के साथ-साथ शिक्षको ने भी प्रकृति की पाठशाला का अध्ययन करवाया गया वही। इधर धार डीएफओ निर्देश पर धार जमनजती पर आयोजनकर जंगल व वन्यप्राणी के प्रति मानव की सझकता के बारे में भी बताया गया है। कार्यक्रम बच्चो को भोजन भी करवाया गया। जैवविविधता प्रश्नावली एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों आयोजन किया गया जिसमें छात्र -छात्राओ को प्रमाण पत्र वितरित कर पुरूस्कृत किया गया। इस मौके पर धार डिविजन के कर्मचारी के साथ बाबूओ ने भी जगल के बारे में जानकारी ली।



