धार वन विभाग का नवाचार: प्रदेश का पहला ड्रोन स्क्वायड गठित किया है। अब जिले के जंगलों की निगरानी जमीन से नहीं, बल्कि आसमान करेगा विभाग।
टीम बनाई जिसमें चार कर्मचारियों जिले में अलग अलग क्षेत्र में पहुंचकर करेंगे कार्य एक लाख हेक्टेयर में हे जंगल।

आशीष यादव धार,
धार जिले में वन विभाग ने एक नवाचार करते हुए प्रदेश का पहला ड्रोन स्क्वायड गठित किया है। अब जिले के जंगलों की निगरानी जमीन से नहीं, बल्कि आसमान से भी की जाएगी। इस आधुनिक पहल से जंगलों में होने वाले अतिक्रमण, आग लगने, वन्यजीवों की गतिविधियों और विभागीय कार्रवाइयों पर पहले से कहीं ज्यादा प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा। ये नवाचार न केवल धार जिले के लिए एक मिसाल बनकर सामने आया है। वन विभाग द्वारा गठित ड्रोन स्क्वायड के लिए विशेष टीम बनाई गई है। जिन्हें इंदौर में ही ड्रोन संचालन और निगरानी का प्रशिक्षण दिया गया है। इसमें डिप्टी रेंजर, दो वन दो वन रक्षक व एक आपरेटर नियुक्त किया गया है। ये टीम ड्रोन के माध्यम से जंगलों की नियमित मानिटरिंग करेगी और हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखेगी। जिन वन क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं अधिक होती हैं, वहां ड्रोन के जरिए तुरंत स्थिति का आकलन किया जाएगा। इससे ये स्पष्ट रूप से पता चल सकेगा कि आग कितने क्षेत्र में फैली है और उसे बुझाने के लिए कितने संसाधनों की जरूरत होगी।

एक लाख से ज्यादा हेक्टेयर में जंगल:
बता दें कि धार जिले में करीब सवा लाख हेक्टेयर में वन क्षेत्र फैला हुआ है, जो सात रेंज में विभाजित है। जिले के अधिकांश जंगल लंबे समय से अतिक्रमण के साए में रहे हैं। ऐसे में ड्रोन स्क्वायड की शुरुआत से न केवल निगरानी तंत्र मजबूत होगा, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और वन भूमि की सुरक्षा को भी नई दिशा मिलेगी। ये पहल वन विभाग के कामकाज को तकनीक से जोड़ते हुए एक नई पहचान दिलाने वाली साबित होगी। वहीं जिले में सबसे ज्यादा जंगल टांडा धार, कुक्षी, सरदारपुर में हे वहीं धामनोद व बाग में इनसे थोड़ा कम हे।
अब लगेगी अतिक्रमण पर लगेगी रोक:
ड्रोन स्क्वायड का सबसे बड़ा फायदा वन भूमि पर हो रहे अतिक्रमण को रोकने में भी मिलेगा। विभाग ड्रोन से जंगलों की फोटो और वीडियो कैप्चर करेगा, जिससे ये पता चल सकेगा कि किसी क्षेत्र में नया अतिक्रमण हुआ है या नहीं पुराने रिकार्ड से तुलना कर कार्रवाई की जा सकेगी। इससे अवैध कब्जों पर समय रहते शिकंजा कसना आसान होगा। साथ ली ड्रोन से नजर रखने में अतिक्रमण करने वाले लोगों में डर बना जायेगा और कहीं हद तक अतिक्रमण पर भी रोक लगेगी।

वन्यप्राणी पर भी रख सकेंगे नजर:
वहीं जगल में वन्यजीवों के मूवमेंट पर भी रखी जा सकेगी निगरानी वन्यप्राणियों की निगरानी में भी ड्रोन अहम भूमिका निभाएगा। कई बार तेंदुए या अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी की सूचना मिलती है, लेकिन बाद में वे नजर नहीं आते। ऐसी स्थिति में ड्रोन के माध्यम से उनके मूवमेंट पर नजर रखी जा सकेगी, जिससे ग्रामीण इलाकों में फैलने वाले डर को कम किया जा सकेगा और समय पर सतर्कता बरती जा सकेगी। अतिक्रमण हटाने के दौरान उड़ाया जाएगा ड्रोन जब वन विभाग की टीम अतिक्रमण हटाने या किसी कार्रवाई के लिए मौके पर जाती है, उस दौरान होने वाले विवाद भी अब ड्रोन कैमरे में रिकार्ड किए जाएंगे। इससे विभाग के कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ेगी और किसी भी तरह के आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति में साक्ष्य उपलब्ध रहेंगे।
यह जिले में नवाचार है:
विभाग ने दो अत्याधुनिक ड्रोन खरीदे हैं और इसके लिए अलग से ड्रोन स्क्वायड गठित किया गया है। ये प्रदेश में अपनी तरह का पहला प्रयोग है, जिससे जंगलों की सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।
विजयानंतम टीआर डीएफओ धार



