
*लाल बाग पर उत्तर पूर्व भारत की लोक संस्कृति*
*200 से अधिक कलाकारों ने दी प्रस्तुतियां*
*शिल्प मेला अपने पूरे शबाब पर*

इंदौर उत्तर पूर्व के जब छह राज्यों लोक कलाकार अपने-अपने प्रदेश की खूबसूरत परिधान पहन कर लाल बाग पर जब मंच पर आए तो ऐसा लगा की संपूर्ण भारत की लोक संस्कृति की अद्भुत छटा निखरकर मंच पर आ गई हो । आज ईशान्य सांस्कृतिक महोत्सव जो की दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र नागपुर एवं लोक संस्कृति मंच इंदौर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित हो रहा है मे खूबसूरत लोक नृत्य ,बांसुरी वादन ,गायन एवं बैंड की प्रस्तुति देखने को मिली।

नागपुर मध्यवर्ती क्षेत्र की निदेशक आस्था कर्लेकर, प्रशन्ना गोगोई एवं लोक संस्कृति मंच के संयोजक एवं सांसद शंकर लालवानी ने बताया कि आज भव्य मंच पर 3 घंटे तक कार्यक्रम की प्रस्तुति हुई जिसमें आठ राज्यों के 200 कलाकार शामिल हुए। 25 दिसंबर से 27 दिसंबर तक चलने वाले इस आयोजन में असम का बिहू, दसोरी दलाई, दहल थूंगरी, सत्रिय अरुणाचल का टप्पू, रेखाम्पाडा ,जूजू जाजा, मणिपुर का बसंत रास, लाई हराओबा, चेराई जगोरी, थंगता, मेघालय का वांगला, काशाद मस्तीह, हार्वेस्ट डांस, मिजोरम का चेराओ, छेईलाम सारलामा काई, सावलकई नागालैंड का जान्टा, बटरफ्लाई, त्रिपुरा लैंप डांस, सांगरिन डांस देखने को मिलेंगे
*बिहू, बसंत रास से रोशन मंच बांसुरी ने सुनाया राग*
खूबसूरत असम के परिधान पहने सर पर कलंगी लगाएं बिहू नृत्य करते असम के युवक युवतियों और चुटकुले रंगों से सजी मणिपुर के कलाकार द्वारा प्रस्तुत रास नृत्य भगवान कृष्ण द्वारा वन में बांसुरी बजाकर गोपियों के साथ रास करने के नृत्य को दर्शाया गया जहां बिहू ने प्रकृति सौंदर्य कोई यौवन के द्वारा दर्शाया तो वही दिलीप हीरा का बांसुरी वादन सबको मंत्र मुग्ध कर गया 30 मिनट की लयात्मक प्रस्तुति बड़े-बड़े ढोल सुंदर बंबू के का उपयोग उसके अंदर बास चलाते हुए लड़कियों का बंबू नृत्य एवं पिरामिड बनाना सर पर बोतल रखना हाथ में चकरी चलाना रक्षात्मक रूप से तलवार चलाना आक्रमण करना जैसे खूबसूरत नृत्य से सजा यह कार्यक्रम एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहा था। गायन एवं वादन की प्रस्तुति भी खास मन मोह रही थी।
*इंदौर की बेटी ने कला व संस्कृति के बलबूते पर कमाया नाम*
आज लालबाग पर मंच से बोलते हुए इंदौर के सांसद एवं लोक संस्कृति मंच के संयोजक शंकर लालवानी ने अपने विचार साझा करते हुए कहा की आस्था कार्लेकर यह एक ऐसा नाम है जो इंदौर के कला प्रेमियों को कभी विस्मृति नहीं होगा। पिछले 1 वर्ष से दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र नागपुर भारत मंत्रालय के निदेशक पद पर काम कर रही आस्थाजी का जन्म तो वैसे लखनऊ में हुआ लेकिन उनकी सारी शिक्षा मध्य प्रदेश इंदौर में हुई कला अकैडमी गोवा में नाट्य प्रशिक्षण लिया और संस्कृत में एम ए इंदौर से ही किया कत्थक में भी उन्होंने एम ए किया संस्कृति मंत्रालय द्वारा छात्रवृत्ति सीनियर एवं जूनियर लेवल पर प्राप्त की साथी फैलोशिप धारक भी रही आईसीसी आर भारत सरकार द्वारा उज्बेकिस्तान ताशकंद में 3 साल तक कार्य किया एवं इंदौर में मां सविता गोडबोले की संस्था लयशाला में विभिन्न कलाकारों प्रशिक्षण दिया विभिन्न कलाकारों से परिचय भी प्राप्त किया पिछले वर्ष से ही वह नागपुर में निदेशक पद पर कार्यरत है इसमें छह राज्य शामिल है जिसमें मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ महाराष्ट्र कर्नाटक आंध्र प्रदेश तेलंगाना आते हैं जिसका कार्य लोक संस्कृति कल का प्रमोशन डॉक्यूमेंटेशन एवं लगातार इस समृद्धि करना है ।और विशेष बात यह है की आस्था जी आज भी स्टेज पर अपना परफॉर्मेंस देती आ रही है इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ महापौर पुष्यमित्र भार्गव एवं विधायक मालिनी गौड की उपस्थिति में हुआ एवं अतिथि स्वागत लोक संस्कृति मंच के सचिव दीपक लवंगड़े विशाल गिद्वानी स्वाती लवंगडे ,सतीश शर्मा, संकल्प वर्मा ने किया । इस अवसर पर नागपुर केंद्र की उपनिदेशक मिथिला तलवानेकर भी उपस्थित रही।
शिल्प मेला भी अपने पूरे शबाब पर है प्रतिदिन शिल्प मेला सायंकाल 4:00 से शुरू हो जाता है एवं सांस्कृतिक प्रस्तुत या 7:00 से होती है



