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आजादी के बाद पहली बार धार तक पहुंचेगा इंजन जिले में रेल का सपना पुरा दौड़ेगी जमीन पर 50 किमी घंटा की रफ्तार से होगी टेस्टिग।

रेल कनेक्टिविटी का सपना होगा साकार, अब होगी फाइनल टेस्टिंग ट्रैक बिछाने और इलेक्ट्रिफिकेशन का काम अंतिम चरण में।

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आशीष यादव धार 

जिले में आजाद होने के बाद से जिले में रेल सुविधा नहीं थी जो अब पटरी पर जल्द ही दौड़ने वाली हे। वही जिले में ट्रायल के रूप में छुक छूक की आवाज सुनाई देगी। आजादी के बाद पहली बार इस क्षेत्र में ट्रेन की आहट सुनाई देगी, जिससे जिलेवासियों के दशकों पुराने सपनों को पंख लगने वाले हैं। रेल ट्रायल के साथ ही धार जिले के लिए विकास की नई पटरी तैयार हो रही है। बता देकी इंदौर-दाहोद प्रोजेक्ट में पीथमपुर से धार के बीच रेलवे काम पूरा कर अब 38 किमी हिस्से में ट्रायल रन करेगा। 23 से 26 मार्च के बीच ट्रैक पर 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से इंजन (टॉवर वैगन) चलाया जाएगा। आजादी के बाद यह पहला मौका होगा, जब इंजन धार तक पहुंचेगा। रेलवे ने ट्रायल रन की तैयारियां पूरी कर ली हैं। रेलवे के एक अधिकारी ने कहा, पीथमपुर से धार तक का काम रेलवे ने पूरा कर लिया है। अब इस हिस्से में टॉवर वैगन से निरीक्षण किया जाएगा। रेलवे ने आम लोगों से कहा है कि सुबह 9 से रात 9 बजे के बीच स्पीड ट्रायल रन होगा। पीथमपुर से धार के स्टेशनों के बीच कोई भी करीब न जाए, ताकि किसी तरह की दुर्घटना न हो।जिसमें इंजन को 50 किमी प्रति घंटे की गति से दौड़ाकर पटरी की मजबूती और गुणवत्ता परखी जाएगी।

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आदिवासी अंचल को मिलेगा बड़ा लाभ लागत कई गुना बढ़ी:
208 किमी लंबी इस रेल लाइन से धार, झाबुआ और अलीराजपुर जैसे आदिवासी बहुल जिलों को सीधा फायदा मिलेगा। रोजगार, व्यापार और आवागमन के नए रास्ते खुलेंगे, जिससे क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी। परियोजना की शुरुआती लागत करीब 4000 करोड़ रुपए थी, जो अब बढ़कर लगभग 18 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। देरी के बावजूद अब यह प्रोजेक्ट अपने पहले चरण में साकार होता नजर आ रहा है।

बड़ा सवाल अब भी, ट्रेन कब से चलेंगी?
टिही से धार तक ट्रेन कब से चलेंगी, यह बड़ा सवाल है। हालांकि रेलवे अधिकारियों का कहना है कि अभी टनल का काम अधूरा है। मई-जून तक उसे पूरा करने का टारगेट है। टनल का काम पूरा होने के बाद ही ट्रेन चलेगी। हालांकि मई-जून तक भी टनल का काम पूरा होगा या नहीं, यह बड़ा सवाल है। रेलवे अधिकारियों का कहना है, टनल का काम काफी चुनौतीपूर्ण है। इसलिए इसमें समय लग रहा है।

डेडलाइन फरवरी में ही पूरी हो गई अधूरा काम टनल बनी बड़ी चुनौती:
टिही के आगे टनल का काम अभी भी अधूरा है। इसमें दो-तीन महीने का समय और लगेगा। ऐसे में रेलवे फिलहाल टनल के हिस्से को छोड़कर पीथमपुर से धार तक का बाकी काम पूरा कर रहा है। इस हिस्से में ट्रॉली और ट्रायल किया जाएगा। वही अभी रेलवे ट्रैक पर बन रहे ब्रिजो का काम पूरा नहीं हुआ मगर एक साइट की सड़क पूरी कर दी है। टिही से धार तक इंदौर, राऊ, टिही, पीथमपुर, सागौर, गुणावद, धार स्टेशन इस प्रोजेक्ट में आएंगे वहीं टिही के आगे जिस टनल की वजह से लगातार यह प्रोजेक्ट लेट हो रहा है, उसमें बार-बार रेलवे अधिकारी टाइमलाइन बढ़ा रहे हैं। वह टनल मूल प्रोजेक्ट में थी ही नहीं। 2013-14 में टिही के आगे तीन किमी टनल प्रस्तावित कर दी गई। 2017-18 में टनल का काम शुरू हुआ था। कोरोना में इसका कॉन्ट्रैक्ट शॉर्ट टर्मिनेट कर दिया गया। जून 2023 में टनल का काम एक बार फिर शुरू हुआ। देरी के कारण प्रोजेक्ट की लागत तीन गुना से ज्यादा हो गई।

क्या होता है टॉवर वैगन ?
टॉवर वैगन रेलवे का एक खास तरह का स्व-चालित वाहन होता है, जिसका इस्तेमाल विद्युतीकृत रेल लाइनों की जांच और मरम्मत के लिए किया जाता है। यह डीजल इलेक्ट्रिक सिस्टम पर आधारित होता है और ओवरहेड वायर में खराबी आने पर तुरंत मौके पर पहुंचकर काम करने में सक्षम होता है। यही वजह है कि किसी भी नई लाइन के शुरू होने से पहले टॉवर वैगन से निरीक्षण अनिवार्य माना जाता है। कुल मिलाकर, इंदौर-धार रेल लाइन अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। यदि आगामी निरीक्षण और ट्रायल सफल रहते हैं तो जल्द ही इस रूट पर ट्रेनों की सीटी गूंजने लगेगी, जिससे यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

 

फैक्ट फाइल…
2008 में परियोजना का शिलान्यास
208 किमी कुल लंबाई
15 साल देरी से चल रहा है प्रोजेक्ट
1680 करोड़ से ज्यादा। लागत वर्तमान में

 

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