
सेंधवा। एक लोटा जल चढ़ाने मात्र से ही भगवान शिव प्रसन्न हो जाया करते हैं और भोग में भांग और धतूरे जैसी वस्तुओं को पाकर रीझ जाते हैं। भगवान शिव का एक नाम आशुतोष भी है। आशुतोष अर्थात बहुत जल्दी और बहुत कम में प्रसन्न हो जाने वाले। दूसरों से थोड़ा सा लेकर भी उन्हें अधिक से अधिक देने का भाव ही आशुतोष महादेव के जीवन की सीख है। उक्त प्रवचन पंडित आदित्य त्रिपाठी ने अग्रवाल समाज महिला मंडल द्वारा आयोजित शिव महापुराण के छठे दिन सोमवार को सत्यनारायण मंदिर में दिए।
पंडित त्रिपाठी ने बताया की आज व्यक्ति यह नहीं सोच रहा कि मैंने दूसरों को क्या दिया? उसका समग्र चिन्तन इतना ही है कि मुझे दूसरों ने क्या दिया? वह यही चिंता में डूबा रहता है। जबकि भगवान महादेव लेते बहुत थोड़ा हैं और अपना सर्वस्व अपने भक्त के ऊपर लुटा देते हैं । भगवान महादेव ही सामर्थ्यवान है। बड़ा वह है जो दूसरों से लेने का नहीं देने का भाव रखता है। आज कल हमे देखने में आता है की हम पाने की तो अपेक्षा रखते है पर दूसरों को देने में विचार करते है।

शिव परिवार का महाभिषेक किया-
अग्रवाल समाज महिला मंडल द्वारा आचार्य आदित्य त्रिपाठी के माध्यम से महिलाओं द्वारा सत्यनारायण मंदिर पर स्थापित शिव परिवार का महाभिषेक करवाया गया। वहीं पार्थिव शिव लिंग बनाकर रूद्राभिषेक कराया गया। कथा प्रवचन के दौरान मातृ शक्ति महिला मंडल से अंतिम बाला शर्मा, वैशाली मंडलोई, अग्रवाल समाज से श्याम सुंदर तायल, कैलाश काका, राहुल गर्ग, राकेश एरेन, महेश गगर्, गिरधारी गोयल, द्वारका प्रसाद तायल, राजेंद्र नरेड़ी, गजानन मंगल, सुनील अग्रवाल, महिला मंडल से ज्योत्स्ना अग्रवाल, रानी मंगल, किरण तायल, मीना चोमूवाला, सुशीला सिंव्हल, उषा तायल और समस्त कार्यकारिणी सदस्य और बहु बेटी मंडल सदस्य मौजूद रहे।



