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बड़वानी: किसानों के लिए राहत, अगले सप्ताह 3 रेक से मिलेगा यूरिया, जिले में 11107 मीट्रिक टन उपलब्ध

आगामी सप्ताह में 3 रेक से प्राप्त होगा यूरिया

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बड़वानी: जिले के किसानों को उनकी आवश्यकता एवं मांग अनुसार उर्वरकों की उपलब्धता हेतु जिले की मांग भेजते हुये उर्वरक उपलब्ध कराने के लिये भरसक प्रयास किये जा रहे है। वर्तमान में विपणन संघ के डबल लॉक केन्द्रों एवं सहकारी समितियों में यूरिया 20848 मे. टन, डीएपी 4671 मे. टन, एनपीके 9060 मे. टन, पोटाश 2984 मे. टन, सुपर फॉस्फेट 17231 मे.टन, अमोनियम सल्फेट 112 मे. टन, संस्थागत कुल 54906 मे. टन का भण्डारण कराया गया।

प्रकार निजी क्षेत्र में यूरिया 6892 मे. टन, डीएपी 582मे. टन, एनपीके 3767 मे. टन, पोटाश 722 मे. टन, सुपर फॉस्फेरट 14236मे.टन, अमोनियम सल्फेेट 183 मे. टन, निजी क्षेत्र 26382 मे. टन का भण्डारण कराया गया है । इस प्रकार जिले में कुल खरीफ सीजन का लक्ष्य 112700 मे. टन के विरूद्ध 81288 मे. टन भण्डारण कर 70181 मे. टन का वितरण किया गया है। आगामी सप्ताह में प्रस्तावित खण्डवा एवं इन्दौर (मांगलिया) रेंक पाईंट से जिले को यूरिया एवं डीएपी/ कॉम्लेक्स उर्वरक प्राप्त होगा है। जुलाई माह में यूरिया 8000 मे.टन, एनपीके 2500 मे. टन एवं पोटश 1000 मे. टन कुल 11500 मे. टन की मांग की गई है ।
कृषि विभाग के अधिकारियों एवं कृषि वैज्ञानिकों की कृषकों को सलाह है कि डीएपी से बेहतर एनपीके उर्वरक होता है । डीएपी की जगह पर एनपीके उर्वरक 12ः32ः16, 20ः20ः0ः13, 20ः20ः0, 16ः16ः16, 10ः26ः26 उपलब्ध है। डीएपी में पोटाश तत्व की मात्रा नही होती है, अर्थात नत्रजन व फॉस्फोरस होता है, जबकि एनपीके से फसलों में तीन पोषक तत्व नत्रजन, फॉस्फोरस व पोटाश जो संतुलित मात्रा में पौधों को उपलब्ध हो जाते हैं ।पोटाश के उपयोग से पौधे मजबूत होते है एवं दानो में चमक एवं दानों का वजन बढ़ता है ।
अधिक जानकारी के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक, संबंधित क्षेत्र के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के कार्यालय या संबंधित क्षेत्रीय कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क कर सकते है।

  • अगले सप्ताह खंडवा व इंदौर से जिले को मिलेगी यूरिया की आपूर्ति।

  • जिले में अभी 11107 मी. टन खाद उपलब्ध।

  • 70181 मी. टन खाद का अब तक वितरण।

  • कृषि विभाग ने एनपीके उर्वरक के उपयोग को बताया ज्यादा लाभकारी।

  • जुलाई में जिले ने कुल 11500 मी. टन खाद की मांग की।

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