
मुख्यमंत्री के प्रथम आगमन पर इस्कॉन से जुड़े भक्तों ने किया आत्मीय स्वागत,
रखी श्रीकृष्ण लोक के निर्माण की मांग
इस्कॉन इंदौर के अध्यक्ष स्वामी महामनदास के सानिध्य में वैदिक मंगलाचरण के बीच किया सम्मान – 1 करोड़ 77 लाख रु. मंजूर
इंदौर, निपान्या स्थित अंतर्राष्ट्रीय श्रीकृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) मंदिर परिसर से लगे तालाब एवं आसपास के क्षेत्र को श्रीकृष्ण लोक के रूप में विकसित करने, इस्कॉन मंदिर से एडवांस एकेडमी तक के मार्ग को इस्कॉन के संस्थापक भक्ति वेदांत स्वामी प्रभुपाद के नाम पर करने एवं गौशाला के लिए जमीन उपलब्ध कराने की मांग के साथ राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मंदिर आगमन पर मंदिर से जुड़े भक्तों एवं संतों ने इस्कॉन इंदौर के अध्यक्ष स्वामी महामनदास के सानिध्य में आत्मीय सम्मान किया। इस्कॉन गुरुकुल के वेदपाठी बटुकों द्वारा वैदिक मंगलाचरण के बीच डॉ. यादव को शॉल, श्रीफल एवं भगवान राधा गोविन्द की तस्वीर भी भेंट की गई।

इस्कॉन से जुड़े हरि अग्रवाल, शैलेन्द्र मित्तल एवं अशोक गोयल ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रथम मंदिर आगमन के उपलक्ष्य में मंदिर से जुड़े भक्तों ने उनका गरिमापूर्ण अभिनन्दन किया। सांसद शंकर लालवानी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट, विधायक गोलू शुक्ला, श्रीमती मालिनी गौड़, मधु वर्मा एवं भाजपा अध्यक्ष सुमित मिश्रा विशेष रूप से उपस्थित थे। इस अवसर पर पार्षद सुरेश कुरवाड़े, आनंद गोयल, किशोर गोयल, लक्ष्मणदास, गिरधर गोपालदास, प्राणेश्वर प्रभु, अद्विधरणदास, महाकालेश्वर प्रभु, रणवीर प्रभु आदि ने मुख्यमंत्री एवं अन्य अतिथियों का स्वागत किया। इस्कॉन इंदौर अध्यक्ष स्वामी महामनदास ने इस अवसर पर विकास कार्यों के लिए मुख्यमंत्री के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए गौशाला के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध कराने एवं मंदिर परिसर के आसपास पर्यटन क्षेत्र एवं महाकाल लोक की तर्ज पर श्रीकृष्ण लोक का निर्माण कराने तथा एडवांस एकेडमी से इस्कॉन मंदिर तक के मार्ग का नामकरण भक्ति वेदांत स्वामी प्रभुपाद मार्ग करने की मांग भी प्रस्तुत की और उन्हें ज्ञापन भी भेंट किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अभी प्रथम चरण में निपान्या तालाब के सौंदर्यीकरण एवं विकास के लिए 1 करोड़ 77 लाख रुपए की योजना मंजूर की गई है। द्वितीय चरण में अन्य योजनाओं को भी शामिल किया जाएगा। अपने प्रथम मंदिर आगमन पर डॉ. यादव ने सबसे पहले इस्कॉन के संस्थापक भक्ति वेदांत स्वामी प्रभुपाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भगवान राधा गोविन्द की आरती एवं पूजन के पश्चात गौवंश का पूजन भी किया।



