नियम सिर्फ आम जनता के लिए ? रसूख के आगे नतमस्तक हुए जिम्मेदार।
मिठाई शोरुम के लिए व्यवस्तम मार्ग को कर दिया बांधित, रसूख के आगे बेबस दिखा प्रशासन।

आशीष यादव धार।
अगर किसी पर कार्रवाई की बात आती है तो सबसे पहले गरीब वर्ग पर कार्रवाई की जाती है रसूक के आगे हर बार जिम्मेदार अधिकारी हाथ पै हाथ बांधकर बैठ जाते हैं और ना ही कुछ कार्रवाई करते हैं ऐसा ही मामला शुक्रवार को सबसे आवा जाई वाले मार्ग पर देखा गया। शहर के व्यस्ततम कोर्ट रोड पर एक नव-निर्मित मिठाई के शोरूम ओपनिंग के लिए मुख्य मार्ग को ही बंधक बना लिया गया। कार्यक्रम के दौरान रसूखदारों ने यातायात के तमाम नियमों को ताक पर रखकर रास्ता बाधित कर दिया, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। वही जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करते भी तो वहां जिले की सत्तावादी पार्टी के कई बड़े नेता भी दुकान की ओपनिंग के आयोजन में आए थे।

रसूख के आगे बेबस दिखा प्रशासन:
हैरानी की बात यह रही कि जिस मार्ग पर दिनभर यातायात पुलिस हेलमेट और कागजों के नाम पर आम जनता को नियमों का पाठ पढ़ाती है, वहीं इस वीआईपी आयोजन के दौरान पुलिस मौन साधे रही। चर्चा है कि शोरूम संचालक के बड़े अधिकारियों और नेताओं से करीबी संबंध दर्शाते हे जिसके कारण सड़क को निजी जागीर की तरह इस्तेमाल किया गया। दिन भर कोर्ट रोड पर रास्ता में जाम लगता रहा ओर राहगीर परेशान होते रहे, लेकिन किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने इसे रुकवाने की कोशिश तक की। वही जब यातायात के जिम्मेदार को सूचना दी तो मौक़े पर पहुंचकर जाम खुलवाया।
राहगीर हुए परेशान:
शहर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि यही काम किसी गरीब ठेले वाले या छोटे दुकानदार ने किया होता, तो अब तक नगर पालिका और पुलिस भारी जुर्माना वसूल चुकी होती या उसका सामान जब्त कर लिया जाता। लेकिन जब बात शहर केप्रभावशाली लोगों की आई, तो नियम और कायदे ठंडे बस्ते में डाल दिए गए। क्या यातायात के नियम सिर्फ चालान काटने और आम आदमी को परेशान करने के लिए हैं? रसूखदारों के आयोजनों के लिए मुख्य सड़क बंद करना जनता के अधिकारों का हनन है।
सवालों के घेरे में जिम्मेदार:
इस घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या किसी भी निजी आयोजन के लिए सार्वजनिक मार्ग को बाधित करने की अनुमति दी जा सकती है? अगर नहीं, तो स्वीट्स की ओपनिंग के दौरान दिनभर सड़क पर आवा जाई प्रभावित हुई तो इसपर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? शहर की जनता अब प्रशासन से जवाब मांग रही है। क्या जिम्मेदारों के भी मुंह मीठे कर दिए गए।



