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विविध

आज मैं तुम्हें खत में रखकर पहली मुलाकात का वह फूल  भेज रही हूं

प्रत्येक दिन प्रेम के इजहार का और जरिया यदि खत हो तो सोने पर सुहागा - रजनी बंडी

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कविता

प्रत्येक दिन प्रेम के इजहार का और जरिया यदि खत हो तो सोने पर सुहागा – रजनी बंडी

मेरे जीवन साथी  *अजीत* ढेर सारा प्यार ❤️

आज मैं तुम्हें खत में रखकर पहली मुलाकात का वह फूल  भेज रही हूं

जो तुम्हारे साथ भी और तुम्हारे बाद भी  मेरे मन मस्तिष्क की बगिया को हमेशा महकाये रखता हैं

57 साल  आधी से ज्यादा  जिंदगी काट ली मैंने

और इसका आधा हिस्सा तुम्हारे नाम तुम्हारे साथ

लोग कहते हैं कितनी मजबूत है पति चला गया पर कभी आंसू नहीं बहाती

मेरी मजबूती की नींव में तुम्हारे  वे शब्द जो पहली रसोई  के समय तुमने मुझसे कहे थे

मुझे पता है *रजनी* तु कर लेगी

और रही आंसू की बात वह तो तुम्हें बिल्कुल भी पसंद नहीं थे

और दुनिया के सामने तो हरगिज भी नहीं

हर सुबह जब मैं तुम्हारी अलमारी खोलती हूं तो तुम्हारी नीली कमीज से तुम्हारी पसंद के इत्र की हल्की  सी महक तुम्हारी मौजूदगी का एहसास दिलाती है और मेरे दिन को बना देती है

सुबह की चाय से लेकर रात की खामोशी में हर पल  तुम्हारी यादें मेरी जिंदगी में जिद्दी मेहमान की तरह रुक गई है

तुम्हारा अचानक इस तरह से चला जाने से मैं आज भी नाराज हूं

तुमने कहा था जी भर के जिएंगे बुढ़ापे तक

फिर यह वादा खिलाफी क्यों

तुम्हें पता है मुझे अकेलापन काटता है

नयी जिम्मेदारियां से मुझे घबराहट होती है

कभी समाज तोड़ता है तो कभी अपने ही

सच कहूं तो अकेलेपन का यह बोझ बहुत भारी है

सारे दिन भी की भागदौड़ भरी जिंदगी और जिम्मेदारी के बाद जब रात को चश्मा उतार कर मेज पर रखती हूं

और आईने में अपने आप को देखती हूं तो मेरी आंखों में तुम्हारा वह गुरुर  दिखाई देता है

जो कहता है मुझे पता है तु सब कर सकती है

सब कहते हैं तूने कर दिखाया

मैं कहती हूं हमने कर दिखाया

दुनिया जिसे मेरी ताकत कहती है दरअसल वह तुम्हारा उधार का दिया हुआ हौसला है

जिसे मैं आज तक सूद समेत चुका रही हूं

मैं अकेली हूं पर कमजोर नहीं

क्योंकि तुम आज भी मेरी कामयाबी पर कहीं दूर से खामोश हम सफर बनकर मेरे लिए ताली जो बजा रहे हो मेरी हिम्मत जो बढ़ा रहे हो

और हां इस फूल ????को जो कि मेरा दिल❤️ है

संभाल कर रखना

जब तक हम नहीं मिल जाते

अगले किसी जन्म मे

हमेशा से तुम्हारी अपनी

*रजनी भारतीय*

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