सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार का केन्द्र है श्री राम मंदिर पंचकुईया
प्राचिन है श्री राम मंदिर

सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार का केन्द्र है श्री राम मंदिर पंचकुईया
इंदौर । कैलाश मार्ग पर स्थित श्री राम मंदिर पंचकुईया, जहां मानो प्रकृति के निकट जाने का अहसास होता है। जहां धर्म की ध्वजा फहराने के साथ ही सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है। यहां सिर्फ भगवान श्री राम की पुजा ही नहीं होती अपितु सतत धर्म जागरण के कार्य भी किए जाते है।
सेवाओं का अदभूत संगम यहां संस्कृति की अलख जगाती हुई संस्कृत की पाठशाला है तो गौमाता की सेवा भाव के लिए बनी गौशाला भी है। जहां गौमाता है यहीं पक्षियों की सेवा का अदभूत संदेश देती दाना-पानी सेवा जहां रोजाना हजारों तोते एक साथ दान खाते हुए दिखाई देते है। यह सेवाभाव का क्रम यहीं नहीं थमता यहां पर एक अनोखी संस्कृति जीवत है जिसे हम संतसेवा कहते है। यहां आने वाला कोई भी संत बिना सत्कार के नहीं जाता है। यहां पर संतों के भोजन और रहने की पर्याप्त व्यवस्थाएं की गई है।
प्राचिन है श्री राम मंदिर सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और समाज में धर्म की ज्योति प्रज्वलित करने के लिए विक्रम संवत 1650 में परम पूज्य ठाकुरदास जी महाराज ने इस मंदिर की स्थापना की थी। यहां पर भगवान श्रीराम जी अपने चारों भाइयों सहित, भगवान नरसिंह, हनुमान जी महाराज, पंचेश्वर महादेव, नर्मदेश्वर महादेव, विश्वेश्वर महादेव, श्रीरामकृष्ण मंदिर और खेड़ापति सरकार विराजमान हैं।
महाराज के कुशल प्रबंधन झलक महामंडलेश्वर राम गोपाल दास जी महाराज ने श्री राम मंदिर की बागडोर ऐसे संभाल रखी है मानो राम राज्य ही स्थापित कर डाला हो। राम गोपाल दास जी महाराज जहां अलसुबह है प्रभु श्रीराम की सेवा में लग जाते है यहीं आश्रम की तमाम व्यवस्थाएं भी संभालते हुए देखे जा सकते है। वह सुबह नियमित पक्षियों की सेवा करते है तो फिर गौसेवा मंदिर में आने वाले भक्तों और संतो की आवभगत तो ऐसे करते है कि मानों भगवान की सेवा करते है वह अतिथि देवों भव जैसा संदेश देते है। यहां भक्तों को धर्म संदेश देने के साथ ही धर्म मार्ग पर चलने की सीख देते है। वह सिर्फ उपदेश नहीं देते वह स्वयं करके संदेश देते है कि सेवाभाव उनके रग-रग में बसा हो । वह संत है उनकी सेवा भक्तों को करना चाहिए लेकिन वह भक्तों की सेवा करते हुए दिखाई दे सकते है।
आध्यात्मिक शांति, दिव्य ऊर्जा का अहसास यहाँ आने वाला हर भक्त आध्यात्मिक शांति, दिव्य ऊर्जा और परम आनंद का अनुभव करता है। मंदिर परिसर में स्थापित विभिन्न देवालय और आश्रम की सेवा गतिविधियाँ भक्तों के जीवन को नई दिशा देती हैं।



