
*शरणागति के लिए भगवान के चरणों का आश्रय ले*
*भगवान भक्तों के गुण अवगुण नहीं देखते*
इंदौर। भगवान जब राक्षसी पूतना का कल्याण कर सकते हैं हम इंसानों का तो वह कल्याण करते ही हैं। इसके लिए हमें परमात्मा के चरणों तक पहुंचना जरूरी है जब तक शिशु रुदन नहीं करता तब तक मां-बाप उसकी आवश्यकता को नहीं जान पाते इस प्रकार भगवान की शरणागति लेने पर ही हमारा कल्याण होगा। भगवान भक्तों के गुण अवगुण नहीं देखते वह भक्तों की भक्ति और प्रेम को अनुभव करते हैं उपरोक्त विचार आज भागवत कथा के दौरान पाराशर नगर में युवराज स्वामी श्री यतींद्राचार्य जी महाराज ने श्रद्धालुओं के समक्ष व्यक्त किये। उन्होंने कहा यमराज भी भगवान के धरती पर प्रकट होने या अवतरण होने पर सभी पाप आत्माओं को पापों से मुक्त कर जीवन दान दे सकता है तो भगवान भक्तों के लिए सत्कर्म करने वालों को अपने चरणों में शरणागति जरूर देते हैं।

समिति की सुनीता लाठी एवं ज्योति नागौरी ने बताया कि आज प्रारंभ में व्यास पीठ का पूजन रामहुरकट, निलेश लाठी एवं जीतू जिराती ने किया। आज कृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम के साथ बनाया गया जिसमें कृष्ण बने बालक ने माखन चोरी की लीला भी खूबसूरती से मंचित की। युवराज स्वामी यतींद्राचार्य जी महाराज ने पूतना वध का वर्णन इतना सजीव रूप से किया कि श्रद्धालुओं के आंखों से अश्रु धारा बह गई। कथा समाप्ति के पश्चात व्यास पीठ पर भागवत जी की आरती की गई और गोष्टी प्रसाद का वितरण हुआ।



