
घुटनों के दर्द से प्रोस्टेट और थायरॉइड तक बिना सर्जरी इलाज संभव
, सीवीआईसी समिट के दूसरे दिन आधुनिक तकनीकों पर फोकस

इंदौर।।इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी के क्षेत्र में मध्य भारत के सबसे बड़े चिकित्सा आयोजन सीवीआईसी इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी समिट 2026 का दूसरा दिन मरीजों के लिए नई उम्मीद लेकर आया। IRCAD इंडिया, SAIMS परिसर में आयोजित समिट में देशभर से आए विशेषज्ञ डॉक्टरों ने घुटनों के दर्द, प्रोस्टेट बढ़ने, थायरॉइड गांठ, नसों की रुकावट और वैरिकोसील जैसी आम लेकिन जटिल समस्याओं के बिना बड़े ऑपरेशन वाले इलाज पर विस्तार से चर्चा की।
विशेषज्ञों ने बताया कि आज की इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी तकनीकें मरीजों को पारंपरिक सर्जरी से बचाकर कम दर्द, कम खर्च और तेज रिकवरी का विकल्प दे रही हैं। कैथेटर आधारित प्रक्रियाओं के जरिए शरीर की नसों के अंदर से इलाज किया जाता है, जिससे बड़े चीरे की जरूरत नहीं पड़ती और मरीज जल्दी घर लौट सकता है।
पैरों की नसों और ब्लॉकेज के इलाज पर विशेष सत्र, चलने-फिरने में मिल सकती है राहत
दिन की शुरुआत पेरिफेरल इंटरवेंशन सत्र से हुई, जिसमें पैरों की बंद नसों और ब्लॉकेज के इलाज पर विशेषज्ञों ने जानकारी दी। पेडल एक्सेस रीकैनालाइजेशन, पेरिफेरल सीटीओ तकनीक और घुटने के आसपास स्टेंटिंग जैसी प्रक्रियाओं पर लाइव केस आधारित चर्चा हुई। डॉक्टरों ने बताया कि डायबिटीज या उम्र बढ़ने के कारण पैरों में ब्लॉकेज होने से कई बार मरीजों को चलने में दिक्कत या घाव ठीक न होने जैसी समस्या होती है, जिसे अब बिना ओपन सर्जरी ठीक किया जा सकता है।
इसके बाद एम्बोलाइजेशन सत्र में वैरिकोसील एम्बोलाइजेशन, प्रोस्टेट आर्टरी एम्बोलाइजेशन (BPH), घुटनों के दर्द के लिए जेनिकुलर आर्टरी एम्बोलाइजेशन और थायरॉइड आर्टरी एम्बोलाइजेशन जैसी प्रक्रियाओं पर विस्तार से जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि इन तकनीकों से दवा या माइक्रो-पार्टिकल्स सीधे प्रभावित हिस्से तक पहुंचाकर बीमारी को नियंत्रित किया जाता है, जिससे ऑपरेशन की जरूरत काफी हद तक टल जाती है।
थायरॉइड और नसों की बीमारियों के लिए डे-केयर इलाज, उसी दिन घर जा सकते हैं मरीज
थायरॉइड एब्लेशन और वेनस इंटरवेंशन सत्र में थायरॉइड नोड्यूल एब्लेशन और क्रॉनिक डीवीटी में वेनस स्टेंटिंग पर प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि इन प्रक्रियाओं में मरीज को लंबी भर्ती की जरूरत नहीं होती और अधिकतर लोग उसी दिन घर जा सकते हैं। इससे संक्रमण का खतरा कम होता है और इलाज का खर्च भी घटता है।
सीवीआईसी इंदौर के इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट एवं समिट ऑर्गनाइजिंग फैकल्टी सदस्य डॉ. निशांत भार्गव ने कहा,
“दूसरे दिन हमने ऐसी बीमारियों पर फोकस किया जो आम जनता में बहुत ज्यादा देखने को मिलती हैं—जैसे घुटनों का दर्द, प्रोस्टेट बढ़ना या नसों की रुकावट। हमारा प्रयास है कि मरीजों को बड़े ऑपरेशन के डर से गुजरना न पड़े और उन्हें कम दर्द वाली सुरक्षित तकनीकें उपलब्ध हों।”
इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट एवं एंडोवैस्कुलर स्पेशलिस्ट डॉ. आलोक उडिया ने बताया,
“एम्बोलाइजेशन और एब्लेशन जैसी तकनीकों ने सर्जरी का विकल्प तैयार कर दिया है। अब प्रोस्टेट या थायरॉइड की समस्या में भी मरीज को चीर-फाड़ की जरूरत नहीं होती। छोटे से पंचर के जरिए इलाज हो जाता है और रिकवरी बहुत तेज होती है। यही भविष्य की चिकित्सा है।”
सीनियर इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट एवं वैस्कुलर इंटरवेंशन विशेषज्ञ डॉ. शैलेश गुप्ता ने कहा,
“हम चाहते हैं कि इंदौर और आसपास के मरीजों को बड़े महानगरों में जाने की जरूरत न पड़े। इस तरह की ट्रेनिंग से स्थानीय डॉक्टर भी अत्याधुनिक इलाज देने में सक्षम बनेंगे। इससे पूरे क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होंगी।”
इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ. पुनीत गर्ग ने कहा,
“पैरों की नसों में ब्लॉकेज या खून का प्रवाह रुकना आज डायबिटीज और बढ़ती उम्र के मरीजों में आम समस्या बन चुकी है। पहले ऐसे मामलों में बड़ी सर्जरी ही एकमात्र विकल्प होता था, लेकिन अब कैथेटर आधारित इंटरवेंशन से बिना चीरा लगाए नसों को दोबारा खोला जा सकता है। इससे मरीज को कम दर्द होता है, जल्दी राहत मिलती है और कई मामलों में अंग कटने जैसी गंभीर स्थिति से भी बचाव संभव है।”
इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ. वीरेंद्र श्योरैन ने बताया,
“क्रॉनिक डीवीटी और नसों की रुकावट जैसी समस्याएं अक्सर लंबे समय तक नजरअंदाज हो जाती हैं, जिससे सूजन, दर्द और चलने-फिरने में परेशानी बढ़ती है। वेनस स्टेंटिंग और एम्बोलाइजेशन जैसी आधुनिक तकनीकों से अब इन बीमारियों का इलाज बिना ओपन सर्जरी संभव है। हमारा लक्ष्य है कि मरीजों को सुरक्षित, डे-केयर प्रक्रिया के जरिए उसी दिन राहत मिल सके और उनकी जीवन गुणवत्ता बेहतर हो।”



