
*गुरु हमें अज्ञान रूपी अंधकार से मुक्त करता है*
*धन संपत्ति विपत्ति में काम नहीं आती*

इंदौर ।रंग मंच पर हम जब कलाकार के रूप में कभी रावण बनते हैं, कभी कंस बनते हैं, कभी राम बनते हैं ,कभी कृष्णा बनते हैं उसके पीछे छुपे कलाकार को हम पहचान नहीं पाते उसी प्रकार भगवान इस धरा पर अनेक रूपों में मौजूद है लेकिन हम उसे पहचान नहीं पाते। संसार में जीवात्मा 84 लाख योनियों में विभिन्न यातनाओ से भटकते हुए आता है नाना प्रकार के कष्टौ और अंधकार रूपी अज्ञान से हमें ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले जाने वाला गुरु ही होता है गुरु ही दुनिया में हमें प्रभु से मिलाता है। आज भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर राजेंद्र नगर स्थित पाराशर नगर पर यतींद्राचार्य जी महाराज ने श्रद्धालुओं के समक्ष व्यक्त किये। उन्होंने कहा की धन सब संकट के समय काम नहीं आता चाहे कितना बड़ा अमीर व्यक्ति क्यों ना हो वह धन से शारीरिक मानसिक सुख खरीद सकता वहां धन काम नहीं आता वहां प्रभु का कीर्तन प्रभु का स्मरण ही काम आता है ।जिस प्रकार द्रौपदी एवं उत्तरा ने सब कुछ होते हुए भी श्री कृष्ण की शरण ली थी।
समिति के जयेश लाठी जितेंद्र माहेश्वरी एवं सचिन माहेश्वरी ने बताया कि कथा के प्रारंभ में व्यास पीठ का पूजन सुदेश लाठी द्वारा किया गया। कथा के दौरान ध्रुव चरित सुनते समय ध्रुव बनाकर एक सुंदर सा बालक भी मौजूद रहा और लगातार वह प्रभु का जाप करता रहा कथा के अंत में व्यास पीठ की आरती की गई एवं गोष्टी प्रसाद का वितरण हुआ तत्पश्चात द्वारका जी मंत्री द्वारा भव्य खाटू श्याम संध्या का प्रारंभ हुआ जिसमें उन्होंने सारे श्याम भक्तों को भजनों से सरोबार कर झूमने पर मजबूर कर दिया।



