खाताधारकों की मेहनत की कमाई पर डाका डालने वाले पोस्ट मास्टर कुणाल को किया गिरफ्तार, दो ओर फरार जल्दी पकड़ेगी पुलिस
होशंगाबाद में काट रहा था फरारी धार में स्पोर्ट्स कोटे से मिली थी नौकरी लाड़ली लक्ष्मी योजना और एफडी में 35 लाख का घोटाला।
आशीष यादव धार
धार
आदमी अपनी कमाई हुई पूंजी को एकत्रित करके उसकी सुरक्षा के लिए खातों में राशि रखता हे मगर अब तो यह जगह भी सुरक्षित नहीं हे। बता देकी पिछले दिनों धार प्रधान डाकघर में शासकीय योजनाओं की राशि के गंभीर दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है। प्रारंभिक एवं संभागीय जांच में यह खुलासा हुआ है कि डाकघर में पदस्थ निलंबित डिप्टी पोस्ट मास्टर निर्मलसिंह पंवार, पोस्ट मास्टर कुणाल मकवाना और सहायक डिप्टी डाक नेपालसिंह गुडि़या ने मिलीभगत कर लाखों रुपयों की शासकीय राशि का अनाधिकृत रुप से नगद भुगतान कर स्वयं के हित में गलत उपयोग किया गया है। वही जब बड़े अधिकारी द्वारा इसकी जांच की गई तो इसमें चार कर्मचारियों 11 दिसंबर को चार कर्मचारी सस्पेंड कर दिया था और जांच शुरू की गई थी अभी भी लोगो का कहना हे कि जांच में यह लाखों का घोटाला हे। ओर बाद में एफआईआर हुई थी ओर 6 जनवरी के पहले से ही आरोपी फरार चल रहे थे। जिसके बाद प्रमुखता से खबर प्रकाशित की गई थी जिसके बाद पोस्ट मास्टर के पद पर करने वाले कुणाल मकवाना को पुलिस ने होशंगाबाद राउंडअप
कर धार लाई।

लाखों का घोटाला खाताधारक अब भी डरे हुए:
घोटाले के बाद से ही खाताधारक अपने पैसे को लेकर डरे हुए उनकी राशि उनके खाते कब आयेगी इसका जवाब कोई बड़ा अधिकारी भी नहीं दे रहा वहीं चार से पांच खाताधारक के खातों से पैसा निकालने का काम किया गया हे जिसमें धार के मुख्य डाकघर में करीब 35 लाख रुपए के वित्तीय घोटाले का मामला सामने आया है। जिसके बाद पोस्ट मास्टर कुणाल मकवाना पर अपने सहयोगियों के साथ मिलकर ग्राहकों की जमा राशि का गबन करने का आरोप लगा है। आरोप है कि उसने लाड़ली लक्ष्मी योजना और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) सहित विभिन्न योजनाओं के खातों से रकम निकालकर निजी उपयोग में ली। जांच में यह भी सामने आया कि नॉन-पीओएसबी चेक के माध्यम से जमा हुई राशि, जो फिनेकल के 0382 ऑफिस अकाउंट में क्रेडिट होती है, उसका सही समायोजन नहीं किया गया। इसके तहत एसबीआई धार में 8 लाख यूको बैंक में 5 लाख और राज्य सहाकरी बैंक इंदौर में 10 लाख कुल राशि 23 लाख का अनाधिकृत रुप से अन्य खातों में समायोजन कर गबन कर दिया गया। उसके जांच हुई और प्रकरण दर्ज किया गया
था।
मामला सामने आने बाद से ही जांच चल रही थी। जिसके बाद कर्मचारियों को निलंबित कर प्रकरण दर्ज करवाया गया उसके बाद गोपनीय सूचना पर ओर खबर प्रकाशन के बाद नौगांव थाना पुलिस ने मुख्य आरोपी कुणाल मकवाना को होशंगाबाद (नर्मदापुरम) से गिरफ्तार किया। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। मामले में शामिल दो अन्य आरोपी फिलहाल फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है। पुलिस द्वारा की जा रही जांच में आशंका जताई जा रही है कि गबन की राशि 35 लाख रुपए से भी अधिक हो सकती है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने योजनाओं और जमाओं में बड़े पैमाने पर हेराफेरी कर राशि को निजी कार्यों में खर्च किया।
खेल कोटे से मिली थी नौकरी:
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मुख्य आरोपी कुणाल मकवाना राष्ट्रीय स्तर का पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी रहा है। उसने 1996, 1998 और 1999 में ऑल इंडिया बैडमिंटन चैंपियनशिप सहित राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कई खिताब जीते हैं। खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के चलते उसे स्पोर्ट्स कोटे से डाक विभाग में पोस्ट मास्टर के पद पर नियुक्ति मिली थी। अब उसी पद के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।
बिना मूल प्रमाण पत्रों के किया नगद भुगतान:
जानकारी के अनुसार इसके 1 मार्च, 14 जून, 20 जून, 9 जुलाई, 11 जुलाई, 18 जुलाई एवं 28 अक्टूबर 2025 के डिस्चार्ज जर्नलों की जांच में सामने आया कि इन तिथियों में नगद भुगतान तो दर्ज है, लेकिन न तो मूल प्रमाण पत्र उपलब्ध हैं और न ही डिस्चार्ज जर्नल। जांच में पाया गया कि बिना किसी वैध दस्तावेज के प्रमाण पत्रों को अनफ्रीज कर 2,51,883 का नगद भुगतान कर लिया गया। एकीकृत बाल विकास सेवा आईसीडीएस के हस्ताक्षर व मुहर तथा निसरपुर उपडाकघर की ओब्लोंना मुहर लगी हुई थी, जिससे यह स्पष्ट था कि इनका भुगतान पूर्व में हो चुका है। इसके बावजूद इन प्रमाण पत्रों को धार प्रधान डाकघर में पुनः नगद भुगतान कर दिया गया। इन प्रकरणों में कुल 3,57,021 लाख की शासकीय राशि का गबन किया गया।
एफडी के नाम पर की धोखाधड़ी:
एक अन्य मामले में खाताधारक गोकुलसिंह नर्गेश द्वारा एक वर्ष की सावधि जमा एफडी के लिए पोस्टमास्टर धार के नाम 6 लाख का चेक दिया गया था। जांच में पाया गया कि चेक की राशि अनाधिकृत रूप से नगद निकाल ली गई जबकि आज तक खाताधारक का एफडी खाता नहीं खोला गया। खाताधारक ने अपने कथन में इसकी पुष्टि की है। वहीं अन्य खाताधारकों की एफडी के साथ ही इसकी प्रकार की जालसाजी की गई उनकी एफडी से चेक के माध्यम से पोस्ट ऑफिस के खाते में डाली गई थी उसकी बाद से खाताधारकों की जो एफडी करवाई उसकी पासबुक आज तक नहीं मिली जिसके कारण उनको उसे पैसे का डर सता रहा है।



