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खेल जगतइंदौर

लाइफ़ कोच सुरभि पांड्या बता रही हैं, अपने डिज़ाइन किए कर्म आधारित खेलों के बारे में 

बच्चों को संस्कारवान और सकारात्मक बनाते ये खेल

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बच्चों को संस्कारवान और सकारात्मक बनाते ये खेल

..लाइफ़ कोच सुरभि पांड्या बता रही हैं, अपने डिज़ाइन किए कर्म आधारित खेलों के बारे में

इंदौर।  ख़ास तरह के खेल हैं, एक बड़े उद्देश्य को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किए गए खेल। ये खेल सिर्फ़ मनोरंजन नहीं करते बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व का इस तरह से निर्माण करते हैं कि वे अपने ख़ुद के प्रति सचेत तथा जागरूक हों तथा दूसरों के प्रति अधिक संवेदनशील बन सकें। यानी इन खेलों के जरिए एसे व्यक्तित्व का निर्माण होता है जो व्यक्तिगत स्तर पर तो सकारात्मक तथा गुणात्मक परितर्तन करता ही है, साथ ही पारिवारिक तथा सामाजिक स्तर पर भी अपनी जिम्मेदारियों का गहरा अहसास कराता है। इस तरह से ये खेल व्यक्तिगत स्तर से लेकर पारिवारिक तथा सामाजिक स्तर पर एक जिम्मेदार ईकाई बनाता है। इन खेलों की परिकल्पना, योजना तथा डिज़ाइनिंग लाइफ़ कोच सुरभि सेठी पांड्या ने की है। वे इन खेलों के जरिए बच्चों तथा बच्चों के जरिए एक बड़ा सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन लाने की रचनात्मक कोशिशें कर रही हैं।

ये खेल बच्चों को संस्कारित करते हैं, रचनात्मक बनाते हैं, बेहतर, जिम्मेदार तथा संवेदनशील इंसान बनाते हैं। सबसे बड़ी बात ये खेल ख़ुद के प्रति सचेत-जागरूक करते हैं तथा दूसरों के प्रति दयालु तथा त्यागी बनाते हैं। ये खेल देश-विदेश में अपनी सार्थकता साबित कर चुके हैं।

चार थीम, चार मक़सद

हमारे आधुनिक समय की सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि बच्चे अब मैदानों में जाकर खेलने के बजाय अपने स्मार्ट फ़ोन, प्ले स्टेशन तथा तमाम तरह के वीडियो गेम्स के एडिक्ट हो गए हैं। इससे इनमें नकारात्मकता पैदा हो रही है, इनकी बाहरी तथा आंतरिक दुनिया तहस-नहस हो रही है। इनमें मानिसक तथा शारीरिक समस्याएं पैदा ही रही हैं। इसका दुष्परिणाम यह हो रहा है कि इन तमाम बातों का इनके संपूर्ण व्यक्तित्व पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है जो बाद में पारिवारीक तथा सामाजिक समस्या बन जाता है। इसलिए सुरभि पांड्या ने इजाद किए ये खेल एक बड़ा उद्देश्य लेकर बनाए गए हैं। उन्होंने ये खेल चार थीम पर बनाएं हैं तथा चारों खेलों का एक ख़ास अर्थ तथा मक़सद है।

विनम्रता तथा क्षमा सिखाते हैं 

मिसाल के लिए वे बताती हैं कि ‘फ्रीडम राइड’ खेल एक विपरीत शैली का कर्म खेल है, जहां आप संचय करने के बजाय त्याग करके जीतते हैं। यह दर्शाता है कि सच्ची शक्ति स्पष्टता और समर्पण में है। यह खेल आप में निस्वार्थ जैसे गुण पैदा कर अधिक जिम्मेदार बनाता है। दूसरा खेल है-सेंसिकल। यह खेल इंद्रियों की खोज के माध्यम से एक मनोरंजक यात्रा है, जहां आप पहचानना, व्यक्त करना और रूपांतरित करना सीखते हैं। तीसरा खेल ‘द फिफ्थ किंगडम’ है। यह खेल-खेल में क्षमा, विनम्रता और सत्य जैसे आंतरिक गुणों पर आधारित विकल्प चुनकर वास्तविक जीवन की भावनात्मक दुविधाओं से निपटना सिखाता है। सीमित मान्यताओं और छिपे हुए पैटर्न को जड़ से उखाड़ फेंककर और उन्हें प्रेमपूर्वक त्याग देना सिखाता। चौथा खेल है-‘कलर्स।’यह खेल अपने विचारों के छिपे हुए रंगों को खोजना सिखाता है। उन भावनात्मक रंगों को पहचानना सिखाता है जिनसे आप संचालित होते हैं और जो आपके जीवन को आकार देते हैं। और फिर से चुनने की स्वतंत्रता प्राप्त करना सिखाता है।

ये खेल बच्चों की आंतरिक शक्ति बढ़ाते हैं

इन कर्म आधारित खेलों का यह आइडिया कैसे आया? इस सवाल के जवाब में सुरभि पांड्या कहती हैं कि आज मनोरंजन की दुनिया में वीडियो गेम्स, स्क्रीन बेस्ड खेल बच्चों को सिर्फ़ मज़ा, जीतने की इच्छा तथा स्किल्स सिखाते हैं। इस तरह के खेल बच्चों को प्रतिस्पर्धा के लिए अधिक आक्रामक तथा हिंसक बनाते हैं। मैंने सोचा, खेल बच्चों तथा अन्य खेलने वालों का सिर्फ़ मनोरंजन ही ना करें बल्कि उन्हें अंदर से मजबूत बनाएं। चूंकि बच्चों की ज़िंदगी तथा उनका व्यक्तित्व निर्माण उनके शुरुआती खेलों से भी होता है, लिहाजा मैंने सोचा कि वे खेल खेल में अपनी भावनाएं बेहतर ढंग से समझें तथा उन्हें नियंत्रित करना सीखें। गुस्सा, डर तथा अन्य इच्छाएं वह बेहतर ढंग से समझने लगें, उन्हें पहचाने तथा स्पष्टता से फैसला लेने की क्षमता विकसित कर सकें।

टीम वर्क तथा सहयोग की भावना 

सुरभि पांड्या कहती हैं-इन खेलों को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि बच्चा गलतियों को समझे, उन्हें सुधारे। दूसरों की मदद करने में आनंद महसूस करे, टीमवर्क तथा सहयोग का गुण विकसित कर सके। इन खेलों में आध्यात्मिकता, मनोविज्ञान तथा बिहेवियरल साइंस को जोड़ा गया है। इसी के आधार पर इन खेलों की पायलट टेस्टिंग के बाद स्कूलों, परिवारों तथा अंतरराष्ट्रीय समुदायों के लिए लागू किया गया।

सुरभि पांड्या कहती हैं कि आज बच्चे भावनात्मक रूप से असंतुलन, एंग्ज़ाइटी, डिज़िटल एडिक्शन के दबाव में हैं। ऐसे समय में बच्चों को इस तरह के खेलों की ज़रूरत है जो उनकी आंतरिक शक्ति को बढ़ाएं, लाइफ़ स्किल्स डेवलप कर सकें, स्क्रीन टाइम से मुक्ति दिलाएं तथा जीवन के कर्म नियमों को मजेदार ढंग से समझ सकें।

दूसरों के प्रति जिम्मेदारी का अहसास

आज वीडियो गेम्स बच्चों में उग्र उत्तेजना, हिंसक प्रतिस्पर्धा में धकेल रहे हैं तो दूसरी तरफ बेचैनी तथा गलत तरीके से पुरस्कार हासिल करने की इच्छा पैदा कर रहे हैं। लेकिन ये ख़ास तरह से डिज़ाइन किए खेल बच्चों को शांत तथा स्थिर रहने का गुण पैदा करते हैं तो अपने प्रति जागरूक तथा दूसरों के प्रति जिम्मेदार बनाते हैं। ये खेल काउंटर बैलेंस का तरह काम करते हैं तथा हिंसक मानसिकता से मुक्त कर अधिक रचनात्मक भावनाएं पैदा करते हैं।

लाइफ़ चैंजिंग अनुभव

इन खेलों को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिली। जैसे बच्चों को ये खेल अच्छे लगे, वे अपनी भावनाएं व्यक्त करने लगे, इन पर बात करने लगे। वे अपने डर, गुस्से, तनाव को बेहतर ढंग से समझने लगे, टीम वर्क तथा सहयोग के भाव को समझने लगे तथा यह सब करने लगे। दूसरी तरफ पैरेंट्स का कहना था कि वे पहली बार अपने बच्चों को इतनी स्पष्टता तथा परिपक्वता के साथ सोचते देख रहे हैं। बच्चों तथा पैरेंट्स के लिए यह लाइफ़ चैंजिंग अनुभव थे। लोगों का कहना था कि इन खेलों के जरिए बच्चों की निर्णय क्षमता बेहतर हुई, रोज़-ब-रोज़ के द्वंद्व आसान हुए तथा गुस्से पर नियंत्रण करना सीखा। एक तार्किक तथा संतुलित सोच दी। इसका परिणाम यह हुआ कि बच्चों-पेरेंट्स के संबंध बेहतर तथा मज़बूत हुए।

परिवार से जोड़ते खेल  

सुरभि पांड्या बताती हैं कि भारतीय पेरेंट्स का कहना था कि ये खेल बच्चों को संस्कार देते हैं तथा परिवार से ज्यादा जोड़ते हैं। विदेशी पेरेंट्स का कहना था कि ये खेल बच्चों को इमोशनली एजुकेट करते हैं। ये खेल भारत के तमाम शहरों में उपलब्ध हैं तथा इससे लोग खासे लाभान्वित हो रहे हैं। ये खेल अमेरिका के सभी राज्यों-शहरों के साथ ही इंग्लैंड तथा कनाडा में भी उपलब्ध हैं। इन खेलों के बार में तमाम जानकारियां SurbhiPandya.com पर हासिल की जा सकती हैं।

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