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इंदौर

ग्रामीण श्रमिकों के अधिक दिन तक रोजगार को सुनिश्चित किया 

ग्रामीण श्रमिकों के अधिक दिन तक रोजगार को सुनिश्चित किया 

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विकसित भारत गांरटी रोज़गार आजीविका मिशन से महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के संकल्प को पूरा कर रहे प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी –  कैलाश विजयवर्गीय

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वीबी – जी राम जी योजना  ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में एतिहासिक कदम

ग्रामीण श्रमिकों के अधिक दिन तक रोजगार को सुनिश्चित किया

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय ने भाजपा कार्यालय पर पत्रकारों से चर्चा की

 

इंदौर। नगरीय विकास विभाग एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय ने भाजपा नगर अध्यक्ष श्री सुमित मिश्रा, विधायक  रमेश मेंदोला, मधु गहलोत, प्रदेश प्रवक्ता  आलोक दुबे, महामंत्री महेश कुकरेजा, मीडिया प्रभारी  वरुण पाल, मीडिया सहप्रभारी  नितिन शर्मा, रितेश शर्मा की उपस्थिति में भाजपा कार्यालय पर आयोजित पत्रकार वार्ता में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि विकसित भारत गांरटी रोज़गार आजीविका मिशन (विबी जी राम जी योजना) ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में एतिहासिक कदम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज की अवधारणा को साकार करने का काम कर रहे हैं।

विजयवर्गीय ने कहा कि मनरेगा मे 100 दिन रोजगार की ग्यारंटी थी, जी राम जी बिल में 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन की ग्यारंटी दी गई है। जिससे गांवों में समृद्धि आएगी। यह बिल समयबद्ध काम की सुनिश्चितता, बेरोजगारी भत्ता, और डिजिटल मस्टर रोल की ग्यारंटी देता है। जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी। कांग्रेस की सरकार में मनरेगा में कोई ट्रांसपेरेंसी नहीं थी, अब इसमें रियल टाइम डेटा अपलोड होगा। जीपीएस और मोबाइल मॉनिटरिंग होगी और एआई के द्वारा फ्रॉड डिटेक्शन होगा। इससे सही लाभार्थियों को काम मिलेगा और उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा।

नए क़ानून का फोकस 4 प्राथमिकताओं पर है,,,

1. जल संबंधी कार्य,

2. कोर-ग्रामीण बुनियादी ढांचा का निर्माण,

3. आजीविका संबंधी बुनियादी ढाँचा का निर्माण और

4. खराब मौसम के कारण काम में कमी को कम करना है। जल सुरक्षा से खेती को बढ़ावा मिलेगा, सड़कें और कनेक्टिविटी से बाज़ार में सुधार होगा, भंडारण और आजीविका संपत्तियां ग्रामीण आय में वृद्धि लाएगी और जलवायु-अनुकूल कार्य गांवों को सशक्त बनायेंगे। वीबी-जी राम जी बिल में प्रावधान है, कि बुआई और कटाई के मौसम में 60 दिन काम बंद कर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य बुआई और कटाई के समय मजदूरों की कमी नहीं होने देना है।मनरेगा में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। नए बिल में मनरेगा के उलट हर हफ्ते पेमेंट किया जा सकता है। मनरेगा में 15 दिन में मजदूरी का भुगतान होता था। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत @ 2047 के अनुरूप इस योजना के माध्यम से गांवों में विकास का ढांचा मजबूत करना का काम कर रहे हैं।

 

विजयवर्गीय ने कहा कि  राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी ने ग्राम स्वराज की परिकल्पना की थी, उनका मानना था कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है, और गांव तभी आत्मनिर्भर, स्वावलंबी और सक्षम होंगे, जब समाज के हर वर्ग का समग्र विकास होगा। उनके इस सपने को साकार करने का कार्य देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीबी जी राम जी बिल के माध्यम से किया है। यह बिल पूरी तरह महात्मा गांधी जी की भावना के अनुरूप ग्राम स्वराज की कल्पना को साकार करता हैं।

श्री विजयवर्गीय ने कहा कि 2005 में मनरेगा शुरू हुई लेकिन अब ग्रामीण भारत बदल गया है। 2011-12 में ग्रामीण गरीबी 25.7% से घटकर 2023-24 में 4.86% रह गई। साथ ही, कनेक्टिविटी में सुधार हुआ है और आजीविका में विविधता आई है। पुराना ओपन-एंडेड मॉडल अब आज की ग्रामीण अर्थव्यवस्था से मेल नहीं खाता। 2005 में हमारी ज़रूरतें अलग थीं, अब हमारी ज़रूरतें अलग हैं इसलिए इस ग्रामीण रोजगार योजना को 2025 की आवश्यकताओं के साथ पुनः व्यवस्थित करना आवश्यक था। उन्होंने कहा कि मनरेगा पर सबसे अधिक खर्च मोदी सरकार ने किया है। मनरेगा पर अब तक 11.74 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए जिसमें मोदी सरकार ने 8.53 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं।

श्री विजयवर्गीय ने कहा कि रोजगार योजना का नाम पहले से महात्मा गाँधी जी के नाम पर नहीं था। 1980 में इंदिरा गांधी ने सभी पुरानी रोजगार योजनाओं को मिला कर राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम योजना का नाम दिया जिसे राजीव गाँधी ने जवाहर रोजगार योजना का नाम दे दिया। सोनिया-मनमोहन की सरकार ने 2004 में इसे नरेगा कर दिया गया जिसे फिर 2005 में मनरेगा किया गया। कांग्रेस की सरकार ने जब जवाहर रोजगार योजना का नाम बदला था तो क्या यह पंडित जवाहरलाल नेहरू का अपमान नहीं था? इसी तरह, आवास योजना का नाम पहले ग्रामीण आवास योजना था, राजीव गांधी ने 1985 में इसका नाम बदल कर इंदिरा आवास योजना कर दिया था। अप्रैल 2005 में कांग्रेस सरकार ने ग्रामीण विद्युतीकरण योजना को राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना कर दिया। हर योजना में इन्होंने गाँधी (एक परिवार) -नेहरू के नाम जबरन डाले। मोदी सरकार में नाम नहीं, काम बोलता है।

विजयवर्गीय ने कहा कि कांग्रेस सरकारों देश के लगभग 600 संस्थानों, योजनाओं, पुरस्कारों के नाम एक ही परिवार के नाम पर रखे। देश के खेल रत्न अवार्ड को भी राजीव गाँधी के नाम पर रखा गया जबकि खेल में राजीव गाँधी जी का कोई योगदान नहीं था। कांग्रेस की सरकारों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी, सरदार वल्लभ भाई पटेल जी, लाल बहादुर शास्त्री जी जैसे कई महापुरुषों के योगदान को भुला दिया। जबकि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने अपने या किसी के नाम पर योजना का नामकरण नहीं किया, बल्कि उन्होंने इसे सेवा से जोड़ने का काम करते हुए राजभवन का नाम लोकभवन, राजपथ का नाम कर्तव्य पथ, रेस कोर्स रोड का नाम लोक कल्याण मार्ग और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नाम सेवा तीर्थ किया है।

विजयवर्गीय ने कहा कि यह योजना सिर्फ पूर्व योजना का प्रतिस्थापन मात्र नहीं है बल्कि य़ह भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर और तकदीर बदलने वाली योजना है और 2047 तक विकसित भारत के संकल्प में गांवों की भागीदारी को सुनिश्चित करने वाली योजना है।

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