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धार कलेक्टर ने कहा- SIR की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी आरोपों को निराधार बताया।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने लगाया आरोप, आदिवासियों के वोट काटने की साजिश

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आशीष यादव धार

जिले में चल रहे निर्वाचन के कार्य के साथ अब राजनीतिक भी तेज हो गई है। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और गंधवानी विधायक उमंग सिंघार ने प्रदेश सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि धार समेत कई आदिवासी बहुल जिलों में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काटने की साजिश चल रही है। सिंघार के अनुसार, मजदूरी के लिए बाहर गए आदिवासी परिवारों को ‘शिफ्टेड वोटर्स’ बताकर SIR फॉर्म भरवाए जा रहे हैं। इन फॉर्म्स के आधार पर बड़ी संख्या में आदिवासियों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं। उन्होंने धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपने अधीनस्थ प्रशासनिक अमले को मौखिक निर्देश देकर SIR फॉर्म भरने की प्रक्रिया रोकने को कहा है।

मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप:
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि ये आदिवासी मजदूर मजबूरी में गुजरात और अन्य राज्यों में काम करने जाते हैं। उनके लिए 3000 रुपए खर्च करके सिर्फ SIR फॉर्म भरने गांव लौटना संभव नहीं है। उन्हें ‘शिफ्टेड वोटर’ बताना गलत है। सिंघार ने यह भी कहा कि यह समस्या केवल एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश का मामला है। उनका आरोप है कि प्रदेश सरकार 50 लाख मतदाताओं के नाम हटाने की तैयारी में है, जिसका सबसे अधिक प्रभाव आदिवासी क्षेत्रों पर पड़ेगा।

चुनाव आयोग से जांच की मांग की:
चुनाव आयोग से इस पूरे मामले में तत्काल संज्ञान लेने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। सिंघार ने जोर देकर कहा कि काम की मजबूरी से बाहर रहने वाले लोगों को मतदाता सूची से हटाना पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है और यह आदिवासी समुदाय को राजनीतिक रूप से कमजोर करने का प्रयास है।
जानकारी के अनुसार, जिले में SIR फॉर्म के आधार पर बड़ी संख्या में फील्ड विजिट की तैयारी थी, जिसे फिलहाल रोक दिया गया है। इस मामले में प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

आरोप- 50 लाख वोटर्स के नाम हटाने की तैयारी:
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने अधिकारियों को मौखिक रूप से SIR फॉर्म भरने की प्रक्रिया रोकने का निर्देश दिया था, क्योंकि इससे बड़ी संख्या में आदिवासी वोटर्स प्रभावित हो सकते थे। सिंघार ने कलेक्टर पर निशाना साधते हुए कहा कि मजदूरी के लिए बाहर गए लोगों को ‘शिफ्टेड’ बताना गलत है और वे केवल फॉर्म भरने के लिए तीन हजार रुपए खर्च करके गांव वापस नहीं आ सकते सिंघार ने दावा किया कि पूरे प्रदेश में लगभग 50 लाख वोटर्स के नाम हटाने की तैयारी है, जिसका सबसे अधिक असर आदिवासी क्षेत्रो पड़ेगा। उन्होंने चुनाव आयोग से इस मामले का तुरंत संज्ञान लेने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

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धार कलेक्टर बोले- पूरी प्रक्रिया पारदर्शी:
उमंग सिंघार के आरोपों के बाद धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने रविवार को अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “गंधवानी विधायक उमंग सिंघार द्वारा मेरे ऊपर लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं।” कलेक्टर मिश्रा ने स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है और इसमें कहीं भी कोई रोक या अनियमितता नहीं है। उन्होंने बताया कि जो लोग काम के सिलसिले में जिले से बाहर हैं, उनके परिवारजनों को गणना प्रपत्र देकर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सहमति से हस्ताक्षरित फॉर्म लिए जा रहे हैं। प्रशासन भारत निर्वाचन आयोग द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के आधार पर ही काम कर रहा है।

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