
*मणिपुर के लोक नृत्यो ने बांधा समा*
*दसोरी दलाई, दहल थूंगरी तंगथा वांग्ला नृत्य हुए*
*उत्तर पूर्वी राज्यों के शिल्प को लेने की मची होड़*
इंदौर ।आज ईशान्य सांस्कृतिक महोत्सव जो की दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र नागपुर एवं लोक संस्कृति मंच इंदौर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित हो रहा है मे खूबसूरत लोक नृत्यो तालमेल देखने को मिला जिसमें खूबसूरत पारंपरिक परिधान पहने लोक कलाकारों की छठा देखने लायक थी बड़े-बड़े ड्रम हाथ में लिए थाप लगाते नृत्य करते कलाकार बहुत ही सुंदर प्रतीत हो रहे थे।
नागपुर मध्यवर्ती क्षेत्र की निदेशक आस्था कर्लेकर एवं लोक संस्कृति मंच के संयोजक एवं सांसद शंकर लालवानी ने बताया कि आज शिल्प मेले में लोगों के बीच असम के बांस शिल्प, केन शिल्प मेघालय मणिपुर के एंब्रॉयडरी युक्त कपड़े टोपिया स्टोल लेने की होड़ मची हुई थी। मणिपुर मेघालय असम मिजोरम क्षेत्र में होने वाले पौधों से बनने वाले कई उपयोगी उत्पाद जैसे पर्,स हैंडबैग, कपड़े ,खिलौने, ड्राई फ्लावर, रंगीन फ्लावर जैसे कई उत्पाद यहां पर विक्रय के लिए उपलब्ध थे ।भव्य मंच पर 3 घंटे तक कार्यक्रम की प्रस्तुति हुई जिसमें आठ राज्यों के कलाकार शामिल हुए। 25 दिसंबर से 27 दिसंबर तक चलने वाले इस आयोजन में असम का बिहू, दसोरी दलाई, दहल थूंगरी, सत्रिय अरुणाचल का टप्पू, रेखाम्पाडा ,जूजू जाफा, मणिपुर का बसंत रास, लाई हराओबा, चेराई जगोरी, थंगता, मेघालय का वांगला, काशाद मस्तीह, हार्वेस्ट डांस, मिजोरम का चेराओ, छेईलाम सारलामा काई, सावलकई नागालैंड का जान्टा, बटरफ्लाई, त्रिपुरा लैंप डांस, सांगरिन डांस देखने को मिलेंगे
*थांगत, चेराई जगोरी, बटरफ्लाई डांस हुआ*
लोक संस्कृति मंच के दीपक लवंगड़े,सतीश शर्मा , संकल्प वर्मा एवं विशाल गिद्वानी ने बताया कि तलवार से आक्रमण करते हुए एवं रक्षा करते हुए युद्ध लड़ना का स्किलफुल प्रदर्शन देखने को मिला। वही बटरफ्लाई डांस सांगरिन त्रिपुरा का डांस भी खूबसूरत था नागालैंड का जान्टा भी प्रस्तुत हुआ । पिरामिड बनाना सर पर बोतल रखना हाथ में चकरी चलाना रक्षात्मक रूप से तलवार चलाना आक्रमण करना जैसे खूबसूरत नृत्य से सजा यह कार्यक्रम एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहा था। गारो जनजाति का नृत्य वांग्ला ,जवान लड़कियां और लड़कों द्वारा भगवान का धन्यवाद व खुशी जाहिर करने के लिए किया गया खूबसूरत नृत्य था गायन एवं वादन की प्रस्तुति भी खासा मन मोह रही थी।
डीआर प्रसन्ना गोगोई ने बताया आज भी राजेश बोरो के निर्देशन में कलाकारों द्वारा खूबसूरत परिधानिक दृश्य प्रस्तुत किए गए वही दिलीप होरा द्वारा बांसुरी वादन किया गया उत्तर पूर्व की नृत्यो की एक प्रस्तुति अष्ट लक्ष्मी का सुंदर प्रस्तुतीकरण हुआ
शिल्प मेला भी अपने पूरे शबाब पर है प्रतिदिन शिल्प मेला सायंकाल 4:00 से शुरू हो जाता है एवं सांस्कृतिक प्रस्तुत या 7:00 से होती है



