
करोड़पति भिक्षुक का भंडाफोड़, सराफा में सहानुभूति की आड़ में चलता रहा खेल
इंदौर। भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के दौरान शनिवार को महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने सराफा क्षेत्र से ऐसे भिक्षुक को पकड़ा, जिसने पूरे सिस्टम को आईना दिखा दिया। वर्षों से सड़कों पर भीख मांगने वाला मांगीलाल असल में करोड़ों की संपत्ति का मालिक निकला। लकड़ी की फिसलन वाली गाड़ी, पीठ पर टंगा बैग और हाथ में जूते का सहारा लेकर बाजार में घूम-घूमकर लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ किया जा रहा था।
जांच में सामने आया कि रोजाना 500 से 1000 रुपये मिलने की बात कहने वाला मांगीलाल इससे कई गुना अधिक रकम समेट रहा था। भिक्षावृत्ति से मिली नकदी सराफा क्षेत्र के कुछ व्यापारियों को ब्याज पर देने की भी पुष्टि हुई है। पुलिस और विभागीय अफसर अब लेन-देन की कड़ियां खंगाल रहे हैं।
रेस्क्यू दल के नोडल अधिकारी के अनुसार लगातार मिल रही शिकायतों के बाद कार्रवाई की गई। पूछताछ में मांगीलाल ने स्वीकार किया कि शहर के अलग-अलग इलाकों में उसके नाम तीन पक्के मकान हैं। भगत सिंह नगर में 16×45 फीट का तीन मंजिला भवन, शिवनगर में 600 वर्गफीट का दूसरा मकान और अलवास में 10×20 फीट का एक बीएचके शामिल है। अलवास का मकान दिव्यांगता के आधार पर रेड क्रॉस की सहायता से मिला था।
इतना ही नहीं, मांगीलाल के पास तीन ऑटो हैं, जिन्हें किराए पर चलवाया जा रहा है। एक डिजायर कार भी मिली है, जिसे चलाने के लिए ड्राइवर रखा गया है। वह अलवास में माता-पिता के साथ रहता है, जबकि दो भाई अलग रहते हैं।
अभियान में सामने आई इस सच्चाई के बाद प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब जांच एजेंसियां संपत्ति के स्रोत, अवैध लेन-देन और भिक्षावृत्ति नेटवर्क की परतें उधेड़ने में जुट गई हैं।



