
शिक्षकों के शैक्षणिक, व्यावसायिक एवं व्यक्तित्व विकास को ध्यान में रखते हुए दस दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का आयोजन किया
श्री वैष्णव कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स में शिक्षकों के शैक्षणिक, व्यावसायिक एवं व्यक्तित्व विकास हेतु दस दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम
इंदौर। श्री वैष्णव कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स, इंदौर में आज से 21 फरवरी 2026 तक* शिक्षकों के शैक्षणिक, व्यावसायिक एवं व्यक्तित्व विकास को ध्यान में रखते हुए दस दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का आयोजन किया गया। जिसका का विषय *“शैक्षणिक उत्कृष्टता हेतु समग्र शिक्षक विकास” रखा गया।*
कार्यक्रम के प्रारंभ में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. परितोष अवस्थी ने स्वागत भाषण देते हुए अतिथि वक्ता एवं उपस्थित शिक्षकों का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के विकासात्मक कार्यक्रम शिक्षकों को नवीन शैक्षणिक चुनौतियों के अनुरूप स्वयं को अद्यतन करने का अवसर प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. संपूर्ण मेहता, एसोसिएट प्रोफेसर एवं हेड–आउटरीच, ठाकुर ग्लोबल बिज़नेस स्कूल, मुंबई रहे। अपने प्रेरक उद्बोधन में डॉ *. मेहता ने शिक्षक को विद्यार्थियों का आदर्श (रोल मॉडल) बताते हुए कहा कि शिक्षक का आचरण, दृष्टिकोण एवं कार्यशैली विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाती है। उन्होंने बदलते शैक्षणिक परिवेश में व्यवहारिक दक्षताओं, नेतृत्व क्षमता, सतत अधिगम तथा नवाचार के महत्व पर विशेष बल दिया।*
महाविद्यालय के प्रबंधन वर्ग से अध्यक्ष श्री अरविंद गुप्ता ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षक किसी भी शैक्षणिक संस्था की रीढ़ होते हैं। उनकी निरंतर उन्नति से ही शैक्षणिक गुणवत्ता में वृद्धि संभव है।* वहीं सचिव श्री *महेश चिमनानी* ने कहा कि ” *फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम संस्थान की अकादमिक सुदृढ़ता एवं दीर्घकालिक प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक हैं”*
कार्यक्रम में समस्त समिति के समन्वयक प्रो. विभोर ऐरन ने सूत्रधार की भूमिका निभाई। कार्यक्रम का *संचालन एवं संयोजन डॉ. मनीष दुबे* द्वारा किया गया तथा आभार डॉ. अनिल शर्मा द्वारा किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में तकनीकी सहयोग प्रो. राजेश सेठी एवं डॉ. राकेश उपाध्याय का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
इस फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में महाविद्यालय एवं अन्य महाविद्यालय के प्रतिभागी ने सहभागिता की। कार्यक्रम ने शिक्षकों को नवीन शैक्षणिक दृष्टिकोण, सकारात्मक व्यवहार एवं विद्यार्थियों के समग्र विकास के प्रति और अधिक सजग बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।अंत में आभार डॉ राकेश उपाध्याय ने माना।



