
श्रृंगेरी की गुरु परंपरा सनातन धर्म की ज्ञान परंपरा की आधारशिला: आचार्य पं. शर्मा
– शृंगेरी शंकराचार्य जगद्गुरु श्री श्री भारतीतीर्थ महाराज का 76वां वर्धंती महोत्सव मना, चारों वेदों के मंगल मंत्र गूंजे, दिनभर चले कार्यक्रम का शाम को महाआरती के साथ हुआ समापन
– महानिर्वाणी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंदजी भारती महाराज के सान्निध्य में मना महोत्सव
इंदौर. श्रृंगेरी की गुरु परंपरा सनातन धर्म की ज्ञान परंपरा की आधारशिला है, जिसने सदियों से वेद, शास्त्र और आध्यात्मिक मूल्यों का संरक्षण किया है। जगद्गुरु श्रीश्री भारती तीर्थ महास्वामी का जीवन और उनका मार्गदर्शन समाज को धर्म, सेवा और संस्कारों के पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। शृंगेरी में मां शारदा देवी की विशेष पूजा होती है, यह ज्ञान और विद्या की अधिष्ठात्री देवी है, इसलिए इस पीठ को ‘शारदा पीठ’ भी कहा जाता है।
यह बात मध्यप्रदेश ज्योतिष एवं विद्वत परिषद के अध्यक्ष आचार्य पं. रामचंद्र शर्मा वैदिक ने शृंगेरी पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य श्री श्री भारती तीर्थ महाराज के 76वें वर्धित महोत्सव के दौरान आयोजित कार्यक्रम में कही। जगद्गुरु शंकराचार्य के 76वें वर्धंती महोत्सव की शुरुआत महानिर्वाणी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंदजी भारती महाराज के सान्निध्य में दीप प्रज्ज्वलन और जयघोष के साथ हुई। स्वामीजी ने कहा शृंगेरी पीठ सबसे प्राचीन में से एक पीठ है। वहीं, महोत्सव के दौरान 21 विद्वानों के सानिध्य में वेद पारायण किया गया। इसके साथ ही नवचंडी महायज्ञ और आयुष्य सुक्तों का सस्वर पाठ भी संपन्न हुआ। सुबह से शाम तक चले पूजन-अर्चन और वैदिक अनुष्ठानों में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान ब्रह्मचारी प्रशांत अग्निहोत्री, विनोद सिंघल, सीए मोहित शर्मा, आशुतोष ठक्कर आदि मौजूद थे। संचालन सीए पं. सोमेंद्र शर्मा ने किया। महोत्सव के जब चारों वेदों के मंगल मंत्र गूंजे तो एक अलग ही धार्मिक माहौल नजर आया। शाम को जगद्गुरु शंकराचार्यजी की महाआरती के साथ महोत्सव का समापन हुआ।



