
माँ शाकम्भरी को 11 किस्म के फूलों का गजरा, सुहाग सामग्री एवं चुनरी समर्पित, मंगल पाठ एवं तांडव आरती में झूम उठे हजारों श्रद्धालु
सुबह से देर रात तक चले महोत्सव में 40 से अधिक वैश्य संगठनों के 1200 परिवारों ने की उत्साहपूर्ण भागीदारी-101 कन्याओं का पूजन भी

इंदौर। साग-सब्जी, फल-फूल और देश को वनस्पत्ति संपदा की आपूर्ति करने वाली मां शाकंभरी देवी की जयंती शनिवार शाम बायपास स्थित सम्पत्त पैलेस पर तांडव एवं पंचरत्न आरती, कन्या पूजन तथा मंगल पाठ के दौरान नृत्य नाटिका के साथ धूमधाम से संपन्न हुई। सुबह सुसज्जित मंदिर की प्रतिकृति एवं मातारानी के श्रृंगारित दरबार में भजन-पूजन, अभिषेक के बाद संध्या को फूल बंगले में विराजित मां शाकंभरी की प्रतिकृति के समक्ष 11 किस्म के फूलों का गजरा, सुहाग सामग्री एवं चुनरी समर्पित करने के बाद मालवांचल के 40 से अधिक वैश्य घटकों एवं अन्य समुदायों के 1200 से अधिक परिवारों की भागीदारी में जैसे ही आरती प्रारंभ हुई, हजारों श्रद्धालु झूम उठे। तांडव एवं क्षिप्रा आरती के मनोहारी दृश्यों ने भक्तों को भाव विभोर एवं रोमांचित कर दिया। उत्सव में समूचा परिसर इस वर्ष भी डिस्पोजल मुक्त रहा और भक्तों ने किसी भी भोज कार्यक्रम में जूठन नहीं छोड़ने का संकल्प लिया। सकराय धाम से शाकम्भरी सेवा समिति के श्याम डोकानिया एवं दीपक सैनी विशेष रूप से इस महोत्सव में शामिल हुए।
महोत्सव की शुरूआत आचार्य प. प्रद्युम्न दीक्षित एवं आचार्यों के निर्देशन में गणेश स्थापना एवं मंडल पूजन के साथ 11 विद्वानों द्वारा की गई। प्रारंभ में ट्रस्ट की ओर से कार्यक्रम संयोजक प्रभारी गोपाल अग्रवाल, रामप्रसाद सोनथलिया, किशनलाल एरन, अनिल खंडेलवाल, जयेश अग्रवाल, अशोक एरन, मनीष खजांची, गोपाल जिंदल, मुन्नालाल बंसल, हरिनारायण छोगालाल बंसल, चंदू गोयल, रमेश एरन, प्रभात अग्रवाल, हरि अग्रवाल सहित मातृशक्ति ने मंगल पाठ में भी अपनी भागीदारी दर्ज कराई। मंगल पाठ में श्रीमती ममता गर्ग के सानिध्य में सरोज ऐरन, विमलादेवी धानुका, पुष्पादेवी खंडेलवाल, मुकेश अग्रवाल एवं शिमला देवी अग्रवाल सहित सैकड़ों महिलाओं ने भाव विभोर होकर भाग लिया। करीब तीन घंटे तक चले मंगल पाठ एवं नृत्य-नाटिका ने समूचे परिसर को भक्ति भाव से गुंजायमान बनाए रखा। संध्या को ठीक 6.45 बजे परंपरागत तांडव आरती पं. विश्वजीत महाराज के सानिध्य एवं माँ नर्मदा की आरती उज्जैन के पं. नन्दू गुरु की टीम द्वारा शुरू करते ही हजारों श्रद्धालु झूम उठे। आरती के पश्चात कन्या पूजन का दिव्य आयोजन भी इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण बना रहा। शाम को भक्तों का हुजूम निरंतर बढ़ता चला गया और लगभग 10 हजार भक्तों ने पुष्प बंगले की शक्ल में सजे माँ शाकम्भरी के दरबार के दर्शनों का पुण्यलाभ उठाया। पुष्प बंगला इतना आकर्षक, मनोहारी, सजीव एवं मनभावन था कि हर कोई देखता ही रह गया। सैकड़ों मोबाईल कैमरों में यह श्रृंगार कैद हुआ। समूचे परिसर को फूल एवं पत्तियों तथा विद्युत सज्जा से श्रृंगारित किया गया था।
सम्पूर्ण उत्सव में कहीं भी डिस्पोजल का प्रयोग नहीं किया गया और परिसर को प्लास्टिक एवं पॉलीथीन से मुक्त रखा गया। भोजन प्रसादी के लिए स्टील के थाली-गिलास तथा पेयजल के लिए तांबे के कलश प्रयुक्त किए गए। महत्वपूर्ण बात यह भी रही कि मां शाकम्भरी की साक्षी में हजारों भक्तों ने किसी भी मांगलिक अथवा पारिवारिक कार्यक्रम में जूठन नहीं छोड़ने का संकल्प भी लिया। आयोजन समिति के मुकेश अग्रवाल, विलेश एरन, योगेन्द्र खंडेलवाल, संजय अग्रवाल, विशाल खंडेलवाल सहित 50 से अधिक श्रद्धालुओं ने महोत्सव की विभिन्न व्यवस्थाएं संभाली। अंत में अनिल खंडेलवाल ने आभार माना।



