
भक्ति के बीज बचपन में ही डालें, पचपन में नहीं : पं. शास्त्री
लोहारपट्टी स्थित खाड़ी के मंदिर पर चल रहे संगीतमय भागवत ज्ञानयज्ञ में आज मनेगा कृष्ण जन्मोत्सव
इन्दौर। भक्ति किसी भी रूप में हो, उसका प्रतिफल अवश्य मिलता है। विडम्बना है कि हमें वृद्धावस्था में ही भक्ति का जोश और जज्बा चढ़ता है, जब हमारे शरीर की इन्द्रियां कमजोर हो जाती हैं। यदि बाल्यकाल से ही भक्ति के संस्कार मिलें, तो वृद्धावस्था संवर जाएगी। भक्ति के बीज बचपन में डालें, पचपन में नहीं। भक्ति में निष्काम भाव होना चाहिए। भक्ति के नाम पर पाखंड या प्रदर्शन ज्यादा दिनों तक नहीं चल सकता। कलियुग में पाखंड और प्रदर्शन का ही बोलबाला चल रहा है।
ये प्रेरक विचार हैं भागवत भूषण आचार्य पं. राजेश शास्त्री के, जो उन्होंने लोहारपट्टी स्थित श्रीजी कल्याण धाम, खाड़ी के मंदिर पर हंसदास मठ के पीठाधीश्वर श्रीमहंत स्वामी रामचरणदास महाराज एवं महामंडलेश्वर महंत पवनदास महाराज के सानिध्य में चल रहे भागवत ज्ञानयज्ञ में बालक ध्रुव की भक्ति एवं वामन अवतार प्रसंगों की व्याख्या के दौरान व्यक्त किए। देश में भगवान कल्याणजी महाराज के केवल दो ही मंदिर हैं उनमें से एक मंदिर जयपुर के पास डिग्गी में और दूसरा लोहारपट्टी इंदौर स्थित खाड़ी के मंदिर में। यहाँ प्रतिदिन कल्याणजी का नई पोषाक बनाकर नित्य नूतन श्रृंगार भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। कथा शुभारंभ के पूर्व संजय पंडित, रामकुमार शर्मा, रामकुमार शर्मा, सुजीत गजेश्वर, तनय शर्मा, सुनील जैन, लीलाधर शर्मा, संजय शर्मा, अजय व्यास तथा राजेश शास्त्री सहित अनेक श्र्द्धालुओं ने व्यास पीठ का पूजन किया। राधा रानी महिला मंडल की बहनों ने रुक्मणी शर्मा, श्रीमती वर्षा शर्मा, उषा सोनी, श्रुति शर्मा, गीता व्यास, वेदांत शर्मा, चंदा खंडेलवाल, बबली खंडेलवाल, निर्मला सोलंकी, मधु सुगंधी, उर्मिला प्रपन्न, हंसा पंचोली, हेमलता वैष्णव, मधु गुप्ता, श्रेया शर्मा आदि ने आचार्यश्री की अगवानी की। कथा में आज भी भजनों पर श्रद्धालुओं द्वारा नाचने गाने का सिलसिला चलता रहा। मठ के पं. अमितदास महाराज ने बताया कि भागवत ज्ञान यज्ञ का यह क्रम 30 दिसम्बर तक प्रतिदिन दोपहर 4 से सायं 7 बजे तक जारी रहेगा। इस दौरान शनिवार को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, रविवार को गोवर्धन पूजा, सोमवार को रुक्मणी विवाह एवं मंगलवार को सुदामा चरित्र जैसे उत्सव भी मनाए जाएंगे। मंदिर का वार्षिक अन्नकूट महोत्सव 31 दिसम्बर बुधवार को आयोजित होगा।
भागवत भूषण आचार्य पं. शास्त्री ने कहा कि प्रेम, दया, करूणा, सत्य जैसे गुणों का सृजन भक्तिमार्ग से ही संभव है। हम सबके जीवन में भी सुरूचि और सुनीति का संशय बना रहता है। इसी कारण हम सब अपने लक्ष्य से विमुख हो जाते हैं। भगवान की भक्ति का मतलब यह नहीं है कि हम हिमालय पर चले जाएं या गृहस्थ जीवन की जिम्मेदारी से पलायन कर लें। भक्ति गृहस्थ होते हुए करना ज्यादा चुनौतीपूर्ण काम है। गृहस्थ जीवन को सबसे बड़ा धर्म माना गया है। भारत भूमि को दुनिया में सर्वश्रेष्ठ स्थान इसीलिए मिला क्योंकि यह भक्तों और संतों की ही भूमि रही है। जितने भक्त एवं संत भारत में हुए, उतने कहीं और किसी भी देश में नहीं हुए हैं।



